कुलपति Dr. Rana Singh ने कहा, अपना संविधान अवश्य पढ़ें युवा

मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी में गणतंत्र दिवस कुलपति Dr. Rana Singh ने कहा कि मातृभूमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिये असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहुति दी थी। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप हमारा देश गणतांत्रिक देश हो सका। ऐसे में हमारा फर्ज है कि हम महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर देश की सम्प्रभुता को अक्षुण्य रखें। इतना ही नहीं हमारी युवा पीढ़ी को कम से कम एक बार अपने संविधान का वाचन अवश्य करना चाहिए। हमारे संविधान में क्या लिखा है, इसका ज्ञान युवा पीढ़ी को जरूर होना चाहिए। राष्ट्रगान के बीच संस्कृति यूनिवर्सिटी के छोटे-छोटे दिव्यांग बच्चों ने देशभक्तिपूर्ण मनमोहक कार्यक्रम पेश कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

On the Republic Day, VC Dr. Rana Singh said, 'Once your constitution is young, you must read once
On the Republic Day, VC Dr. Rana Singh said, ‘Once your constitution is young, you must read once

कुलपति Dr. Rana Singh ने कहा कि गणतंत्र का अर्थ है जनता के द्वारा जनता के लिये शासन। इस व्यवस्था को हम सभी पिछले 69 साल से गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। 1950 में जब देश ने पहला गणतंत्र दिवस मनाया, उस वक्त का जज्बा, उस जमाने के लोगों के जज्बात और आज के हालात में बहुत फर्क आ गया है। अब हम अपने राष्ट्रीय पर्व तो मनाते हैं लेकिन उनमें औपचारिकता की सिकुड़न आ गयी है। लोगों के दिलों में अब वह उत्साह हिलोरें नहीं मारता। भारत को एशिया का सबसे बड़ा गणतंत्र होने का गौरव प्राप्त है, यहां सभी धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्र, जाति, समुदाय व वर्ग के लोग रहते हैं। 26 जनवरी, 1950 को देश में पहली बार हमारा संविधान लागू हुआ इसलिए इसका विशेष महत्व है। भारत की गरिमा और सम्प्रभुता को बरकरार रखना सिर्फ सैनिकों का ही नहीं बल्कि हम सबका कर्तव्य है। कुलपति डा. राणा सिंह ने कहा कि हमारे संविधान का अस्तित्व महिलाओं के बिना अधूरा है। देश की सम्प्रभुता में महिलाओं का अतुलनीय योगदान है।

प्रिया शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम, जीयो और जीने दो, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया की पक्षधर है। इसकी रक्षा और देश का विकास युवा तरुणाई के कंधों पर है। हमारा तिरंगा हर भारतीय के अंदर उत्साह, स्वाभिमान और गौरव का संचार करता है। आज के ही दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद व डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे सपूतों ने भारत को दुनिया का अग्रदूत या जगद् गुरु बनाने का सपना देखा था।

छात्र नीरज राय ने अपने सम्बोधन में साथियों का आह्वान किया कि राष्ट्रीयता की भावना का प्रदर्शन करने की बजाय हमें मुल्क के विकास का संकल्प लेना चाहिए। 26 जनवरी का दिन प्रत्येक भारतीय को महापुरुषों के आदर्शों पर चलने की नसीहत देता है। आज आवश्यकता है अपने कुविचार व कुसंस्कार के खिलाफ लड़ने की। भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद, गरीबी, बेरोजगारी व अशिक्षा को दूर भगाना तब तक सम्भव नहीं जब तक कि हम एकजुट प्रयास नहीं करते। छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति पूर्ण कार्यक्रम पेश किए। स्पेशल बच्चों का स्पेशल कार्यक्रम देखने लायक था।

इस अवसर पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. ओ.पी. जसूजा, डिप्टी रजिस्ट्रार सीमा सक्सेना, चीफ प्राक्टर दिलीप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी विवेक श्रीवास्तव, अवधेश शुक्ला, अरविन्द शुक्ला, विजय सक्सेना, असिस्टेंट प्रोफेसर फहीम, कर्मजीत सिंह, प्रो. संतोष मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर दुर्गेश कुमार वर्मा, डा. रामकुमार, डा. योगेश्वर पाण्डेय, रवि प्रकाश मौर्य, डा. जफर जावेद, देवेन्द्र कुमार शर्मा, प्रवीण, आशीष, अपूर्वा, सुधांशु पी. शाह, मेराज खान, निसार अनवर सहित सभी संकाय के प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *