आर्थिक मोर्चे पर लड़ाई हारता दिख रहा है ISIS:रिपोर्ट

On the economic front is visible loses fight ISIS: reportबगदाद। इस्लामिक राज्य बनाने का सपना पाले बैठे खूंखार आतंकवादी संगठन ISIS आर्थिक मोर्चे पर अपनी लड़ाई हारता दिख रहा है। इस संगठन का बिजनस मॉडल लगातार कमजोर हो रहा है और इसके हाथ से हर इलाके के फिसलने के साथ ही पैसे की लड़ाई भी हार रहा है।
इंटरनैशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रैडिकलाइजेशन एंड पॉलिटिकल वॉयलेंस द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि IS का बिजनस मॉडल कमजोर होता जा रहा है। यह 2014 के मध्य से ही हो रहा है जब संगठन ने बैंकों, तेल के कुंओं और हथियारों के गोदामों पर कब्जा करना शुरू किया था।
रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक स्टेट की आय वर्ष 2014 में 1.9 अरब डॉलर से घटकर 2016 में 87 करोड़ डॉलर तक ही रह गई है।
लंदन के किंग्स कॉलेज में सेंटर के निदेशक पीटर न्यूमैन ने कहा, ‘IS के बारे में हमने पहले जो गलतियां कीं, उनमें इसे पूरी तरह से आतंकवादी संगठन मानना शामिल है। यह आतंकवादी से बढ़कर है। यह पूरे क्षेत्र पर कब्जा रखता है, जिसका मतलब है कि इसके खर्चे अधिक होंगे। इसे सड़क से स्वास्थ्य तक सभी सेवाओं का खर्च खुद ही वहन करना पड़ता होगा।’
उन्होंने कहा,’आर्थिक रुप से कमजोर होने का मतलब ये नहीं है कि संगठन कम खतरनाक हो गया है। पेरिस और बर्लिन के हमलों से पता चलता है कि दोनों में से कोई भी खर्चीला नहीं था। यूरोप और यूएस में हुए हालिया हमलों को अंजाम देने वालों ने इसका खर्चा खुद ही उठाया। इसमें IS लीडरशिप ने थोड़ी बहुत ही मदद की।’
न्यूमैन ने कहा, ‘ISIS की रेवेन्यू का मुख्य सोर्स टैक्स, फीस, तेल, वसूली और लूट के अन्य माध्यम हैं। कब्जे किए गए इलाकों को चलाते रहने के लिए इन सबका जरूरी है। अगस्त 2014 से अब तक IS, इराक में 62 प्रतिशत और सीरिया में 30 प्रतिशत तक क्षेत्र को गंवा चुका है।’ उन्होंने कहा कि इससे ISIS का प्रभाव कमजोर पड़ेगा।
-एजेंसी

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