प्रयागराज कुम्‍भ मेले में पहला शाही स्‍नान मकर सक्रांति के दिन

प्रयागराज के कुम्‍भ मेले में पहला शाही स्‍नान मकर सक्रांति के दिन होगा और उसी दिन स्नान से पूर्व सभी अखाड़े भव्य पेशवाई के साथ अपनी-अपनी छावनियों में पहुंच जाएंगे।
गौरतलब है कि गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर दिव्य कुम्भ की भव्‍य धर्म नगरी बस चुकी है। यहां दूर-दूर के आस्थावान लोगों का मेले में आना शुरू हो गया है। अखाड़ों की पेशवाई प्रारंभ हो गयी है।
3200 बीघे में फैले मेले में चारों और आस्था और अटूट श्रद्धा का सैलाब है। तपस्या का प्रतिमान माना जाने वाला यह मेला इस बार अध्यात्म के साथ आधुनिकता के रंग में रंगा है। सरकार के प्रयासों से वैश्विक स्तर पर कुम्भ की छटा बिखरने लगी है। फाफामऊ से लेकर अरैल और दारागंज से झूंसी तक फैली कुम्भ नगरी 20 सेक्टर में बंटी है।
कुम्भ का अर्थ
कुम्भ एक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला नहीं बल्कि इसके कई मायने हैं। चिंतकों, विचारकों का मानना है कि कुम्भ प्रकृति और मानव जीवन का संयोजन है। कुम्भ आत्म प्रकाश का मार्ग है। कुम्भ जीवन की गतिशीलता है। कुम्भ ऊर्जा का स्रोत है। कुम्भ मानवता का प्रतीक है। कुम्भ आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह है। कुम्भ समस्त संस्कृतियों का संगम है।
प्रयाग में कुम्भ
ज्योतिष गणना के अनुसार वृहस्पति के मेष राशि में प्रवेश होने तथा सूर्य और चंद्र के मकर राशि में आने पर अमावस्या के दिन प्रयागराज में संगम तट पर कुम्भ का आयोजन होता है।
मुख्य स्नान पर्व की तिथि
मकर संक्रांति : 15 जनवरी
पौष पूर्णिमा : 21 जनवरी
मौनी अमावस्या : 4 फरवरी
वसंत पंचमी : 10 फरवरी
माघ पूर्णिमा : 19 फरवरी
महाशिवरात्रि : 4 मार्च
-एजेंसियां

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