मथुरा में ”तेल माफिया” लड़वा रहा है ”कई प्रमुख प्रत्‍याशियों” को Election

'Oil mafia' funded for 'Many leading candidates' Election Fight in Mathura
मथुरा में ”तेल माफिया” लड़वा रहा है ”कई प्रमुख प्रत्‍याशियों” को Election

मथुरा में कई प्रमुख प्रत्‍याशियों के Election का पूरा खर्च एक कुख्‍यात ”तेल माफिया” द्वारा उठाया जा रहा है ताकि चुनावों के बाद तेल के खेल में उनके राजनीतिक प्रभाव का भरपूर इस्‍तेमाल किया जा सके।
उल्‍लेखनीय है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की मथुरा में स्‍थापित ”रिफाइनरी” देश की प्रमुख ऑयल रिफाइनरीज में से एक है और यहां से बड़े पैमाने पर विभिन्‍न पेट्रो पदार्थ देश के कोने-कोने में पहुंचाए जाते हैं।
पेट्रो पदार्थों की यह सप्‍लाई विभिन्‍न माध्‍यमों जैसे गुड्स ट्रेन और पाइप लाइन के अलावा ट्रक तथा टैंकरों के जरिए भी होती है।
कहने को तो सभी ट्रक और टैंकर्स के माध्‍यम से की जाने वाली सप्‍लाई के लिए बाकायदा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है किंतु हकीकत यह है कि इसी माध्‍यम से पेट्रो उत्‍पादों की बड़े पैमाने पर तस्‍करी तथा कालाबाजारी भी होती है।
मथुरा रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रो पदार्थों की कालाबाजारी एवं तस्‍करी का यह कारोबार हजारों करोड़ का है और इसमें रिफाइनरी के एक अदना कर्मचारी से लेकर उच्‍च अधिकारियों तक तथा रिफाइनरी की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ से लेकर जिले के पुलिस प्रशासन तक की बड़ी भूमिका रहती है।
बताया जाता है कि मथुरा रिफाइनरी से होने वाले पेट्रो पदार्थों के इस खेल में पेट्रोलियम मिनिस्‍ट्री तक के लोग जुड़े हैं और उन्‍हें उनके हिस्‍से का पैसा बराबर मिलता है।
यही कारण है कि कभी मथुरा रिफाइनरी के अंदर से पेट्रो पदार्थों के हजारों ड्रम चोरी हो जाते हैं तो कभी सारी सुरक्षा-व्‍यवस्‍था को धता बताते हुए उस पाइप लाइन को ही काटकर लााखों लीटर तेल चोरी कर लिया जाता है जिसके लिए चप्‍पे-चप्‍पे पर फोर्स तैनात रहती है और कदम-कदम पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
तेल के इस खेल की वजह से मथुरा रिफाइनरी के कई ईमानदार अफसर अपनी जान गंवा चुके हैं और इसी खेल में लिप्‍त माफिया ने अपने कई प्रतिद्वंदियों की जान भी ली है।
मथुरा में तेल माफिया की ताकत और मथुरा रिफाइनरी में उसके वर्चस्‍व का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि वह न सिर्फ पेट्रो उत्‍पाद के हर एक ट्रक व टैंकर पर काबिज़ रहता है बल्‍कि रेलवे स्‍टेशन ”बाद” जहां से पेट्रो उत्‍पादों की ट्रेन भरकर चलती हैं तथा वो क्षेत्र भी जहां पेट्रो उत्‍पादों के गोदाम बने हैं, वहां तक से उसके लिए सीधे सप्‍लाई की जाती है ताकि वह अपना धंधा बेरोकटोक करता रहे।
जाहिर है कि तेल के इस इतने बड़े खेल को स्‍थानीय नेताओं के संरक्षण बिना अंजाम तक पहुंचाना नामुमकिन है इसलिए तेल माफियाओं को हमेशा इनके वरदहस्‍त की जरूरत रहती है।
मथुरा से तेल के अवैध कारोबार को एक गिरोह की शक्‍ल में संचालित करने वाला युवक मथुरा रिफाइनरी के पास ही एक गांव का मूल निवासी है लेकिन अब उसने शहर की पॉश कॉलोनियों को अपना स्‍थाई ठिकाना बना लिया है।
सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इस तेल माफिया ने नेताओं का संरक्षण पाने के लिए कई नेताओं को तो अपने धंधे में बाकायदा साइलेंट पार्टनर बना रखा है जबकि कई को महीनेदारी देता है।
मथुरा से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे नंबर-2 के करीब 90 किलोमीटर क्षेत्र में तो जगह-जगह तेल माफिया के अवैध गोदाम बने ही हैं, साथ ही हाथरस-अलीगढ़ राजमार्ग तथा यूपी से राजस्‍थान को जोड़ने वाले भरतपुर व अलवर मार्ग पर भी तेल माफिया के अड्डे हैं। इस 90 किलोमीटर के बीच ही मथुरा शहर पड़ता है और इसी के बीच स्‍थापित है मथुरा रिफाइनरी।
ऐसे में इन क्षेत्रों से ताल्‍लुक रखने वाले प्रभावशाली नेताओं के सहयोग की तेल माफिया को हर वक्‍त दरकार रहती है।
यही कारण है कि तेल माफिया प्रत्‍येक विधानसभा चुनाव में एक ओर जहां पूरी रुचि रखता है वहीं दूसरी ओर अपना पर्याप्‍त दखल भी चाहता है।
बताया जाता है कि इस बार नोटबंदी के कारण प्रत्‍याशियों को हो रही असुविधा के कारण तेल माफिया का चुनाव में दखल अच्‍छा-खासा बढ़ गया है और उसने कई विधायकों के चुनावी खर्च का जिम्‍मा अपने ऊपर ले लिया है।
पांच विधानसभा क्षेत्रों वाले मथुरा जनपद में एक अनुमान के अनुसार करीब 20 प्रमुख प्रत्‍याशी चुनाव लड़ रहे हैं और इनमें से लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों से तेल माफिया के कारोबार का नाता है। ऐसे में उसने कई उन प्रत्‍याशियों के चुनाव खर्च का जिम्‍मा अपने सिर उठा लिया है जिनके निर्वाचित होने की प्रबल संभावना हैं।
सूत्रों की मानें तो इस तेल माफिया द्वारा मथुरा-वृंदावन विधानसभा क्षेत्र के दो, छाता क्षेत्र के दो, मांट क्षेत्र के एक, गोवर्धन के एक तथा बल्‍देव क्षेत्र के एक प्रमुख प्रत्‍याशी का पूरा चुनाव खर्च अपने स्‍तर से किया जा रहा है।
वैसे इन प्रत्‍याशियों (नेताओं) से इस तेल माफिया के रिश्‍ते जग जाहिर हैं और पूर्व में भी वह लगातार उसे उसके इस अवैध कारोबार में मदद करते रहे हैं किंतु यह पहला मौका है जब वह उनके पूरे चुनाव का खर्च कर रहा है।
ऐसा करने का एक बड़ा कारण नोटबंदी से उपजी समस्‍याएं तो हैं हीं, पेड न्‍यूज़ का मुद्दा तथा चुनाव आयोग की सख्‍ती भी प्रमुख कारण है।
ऐसी स्‍थिति में तेल माफिया उनका वो पूरा खर्च उठा रहा है जिस पर चुनाव आयोग की नजरें गढ़ी रहती हैं और जिनके कारण कोई भी प्रत्‍याशी बड़ी मुसीबत में फंस सकता है।
बड़ी बात यह है कि यही वो खर्चा भी है जिस पर भारी-भरकम रकम खर्च होती है और जिसके कारण रातों-रात मतदाताओं के बड़े वर्ग का रुझान बदलवा लिया जाता है।
तेल माफिया के लिए इस सबके बावजूद यह लाभ का सौदा है क्‍योंकि उसके हिस्‍से में हर क्षेत्र से किसी न किसी की जीत आयेगी ही, और यही जीत या यूं कहें कि जीता हुआ नेता अगले पूरे पांच साल उसके काम आएगा। आखिर मामला करोड़ों का नहीं, सैकड़ों करोड़ का है जबकि चुनाव तो कुछ करोड़ में निपट जाते हैं।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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