Flipkart और ऐमजॉन के खिलाफ फिर एकजुट हुए ऑफलाइन ट्रेडर्स

Flipkart और ऐमजॉन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अगले हफ्ते शुरू हो रहे डिस्काउंट ऑफर्स के खिलाफ ऑफलाइन ट्रेडर्स ने एक बार फिर सरकार से विरोध दर्ज कराया है।
ट्रेडर्स ने ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स Flipkart और ऐमजॉन के डिस्काउंट्स को गैरकानूनी करार देते हुए सरकार से तुरंत एंटी-प्रिडेटरी प्राइसिंग एक्ट लाने की मांग की है और ई-कॉमर्स पॉलिसी पर तेजी दिखाने की अपील भी की है।
Flipkart ने 10 से 14 अक्टूबर तक ‘बिग बिलियन डेज’ और ऐमजॉन ने इसी अवधि में ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल्स’ के तहत भारी छूट की पेशकश की है। इस दौरान दोनों कई नए प्रोडक्ट भी लाने वाले हैं। पिछले कुछ वर्षों से ईटेलर इन ऑफर्स के जरिए कुल फेस्टिव सेल्स में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर रहे हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से शिकायत की है कि कंपनियां एफडीआई रूल्स का उल्लंघन करते हुए अवैध तरीके से बी2सी कारोबार कर रही हैं और प्रिडेटरी प्राइसिंग के जरिए ऑफलाइन ट्रेडर्स को मुकाबले से बाहर करने में लगी हैं। संगठन ने इस बात पर दुख जताया है कि सरकार ई-कॉमर्स पॉलिसी में बेवजह देरी कर रही है, जिसका फायदा इन कंपनियों को मिल रहा है।
कैट के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यही समय है कि सरकार एक एंटी-प्रिडेटरी प्राइसिंग एक्ट या ऑर्डिनेंस लाकर इस तरह की मनमानी पर नियंत्रण लगाए। उन्होंने कहा कि हम कॉमर्स मिनिस्टर से फिर अपील कर रहे हैं कि वे नई ई-कॉमर्स पॉलिसी का तुरंत ऐलान करें। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो पारंपरिक व्यापारियों में यह संदेश जाएगा कि सरकार मल्टीनेशनल कंपनियों और ग्लोबल ईटेलर्स के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने एफडीआई पॉलिसी के सेक्शन 2.3 के सब सेक्शन 9 और प्रेस नोट तीन का हवाला देते हुए कहा कि ई-कॉमर्स मार्केट प्लेस केवल तकनीकी प्लेटफॉर्म मुहैया कराएगा और किसी भी रूप में कीमतों को प्रभावित नहीं करेगा। सब-सेक्शन 2 में यह भी कहा गया है कि ईटेलर सिर्फ अपने पोर्टल पर रजिस्टर्ड ट्रेडर्स से ही व्यापार करेंगे।
खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि ई-कॉमर्स कंपनियां मार्केटप्लेस मॉडल के तहत काम करने का दावा करती हैं, लेकिन वे इनवेंटरी मॉडल में सक्रिय हैं। वे सामान खरीदकर अपने प्रिफ्रेंशियल सेलर्स के माध्यम से अपने प्लेटफॉर्म पर बेचती हैं, जो एफडीआई नॉर्म्स का खुला उल्लंघन है। ई-कॉमर्स पॉलिसी के प्रस्तावित प्रावधानों में बहुत हद तक ईटेलर्स के प्रिफ्रेंशियल सेलर्स और प्रिडेटरी सेल्स पर रोक लगाने की बात कही गई, लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाले जाने की खबरें भी आईं।
-एजेंसियां

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