घटिया मेडिकल सामान खरीदने पर अधिकारी को किम ने दी मौत की सजा

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने चीन से घटिया मेडिकल सामान खरीदने वाले अपने एक बड़े अधिकारी को मौत की सजा सुनाई है।
इस अधिकारी ने राजधानी प्योंगयांग में बन रहे किम जोंग के ड्रीम प्रोजक्ट वाले अस्पताल के लिए चीन से घटिया किस्म के सामान खरीदे थे। किम जोंग इस अस्पताल में हर सामान यूरोपीय देशों से मंगवाना चाहते थे क्योंकि उन्हें विश्वास है कि इन देशों का उत्पाद दुनिया में सबसे बेहतरीन क्वॉलिटी का होता है।
छह महीने में अस्पताल बनवाना चाहते थे किम जोंग
दक्षिण कोरिया के डेली एनके अखबार के अनुसार किम जोंग ने पिछले साल मार्च में बड़ी धूमधाम से प्योंगयांग के जनरल अस्पताल को अपनी उपस्थिति में तुड़वा दिया था। वे इस जगह पर केवल 6 महीने में एक भव्य और बड़ा अस्पताल बनवाना चाहते थे। किम के निर्देश के बावजूद उद्घाटन की तारीख तक यह अस्पताल तैयार नहीं हो सका था। इस अस्पताल में चिकित्सीय उपकरणों की भारी कमी थी इसलिए उत्तर कोरिया के आयात-निर्यात को देखने वाले अधिकारी ने आनन-फानन में चीन से सामान खरीद लिया।
अस्पताल की समीक्षा बैठक में हुआ खुलासा
इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि किम जोंग ने जब इस अस्पताल की समीक्षा बैठक की, तब उन्हें इन सामानों के बारे में जानकारी लगी। उन्होंने तत्काल ही उस अधिकारी को दोषी ठहराते हुए मारने का हुक्म सुना दिया। मारा गया अधिकारी विदेश मंत्रालय में डिप्टी डॉयरेक्टर था, जिसकी उम्र करीब 50 साल थी। इस अधिकारी के पास उत्तर कोरिया में होने वाले आयात और निर्यात की जिम्मेदारी थी।
यूरोपीय सामानों को अच्छा मानते हैं किम जोंग
रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी को बर्खास्त भी किया गया है। किम जोंग उन ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा स्विट्जरलैंड में बिताया है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यूरोपीय देशों का सामान दुनिया के बाकी देशों की अपेक्षा सबसे अच्छी गुणवत्ता का होता है इसलिए उनकी पार्टी ने इस अस्पताल को बनाने के लिए भारी-भरकम फंड आवंटित किया।
प्रतिबंधों और कोरोना के कारण यूरोप से नहीं मिला सामान
बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध और कोरोना वायरस महामारी के कारण यूरोपीय देशों से उत्तर कोरिया को मेडिकल इक्यूपमेंट्स नहीं मिल सके। जिसके बाद चीन से कम कीमत पर घटिया क्वालिटी के सामानों के आयात का फैसला किया गया। इस फैसले की जानकारी किम जोंग को नहीं दी गई। इसी बात की जानकारी जब उत्तर कोरिया के तानाशाह को हुई तो वह भड़क गए।
-एजेंसियां

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