गरीबी की राम (जेठमलानी) रेखा

Of poverty Ram (Jethmalani) line
गरीबी की राम (जेठमलानी) रेखा

आप समझिए कुछ, निकलता कुछ और है।
गरीबी की राम रेखा आ गई है जिसे राम जेठमलानीजी गरीब मान लें, वह गरीब है। जेठमलानीजी प्रति सुनवाई 22 लाख रुपये लेते हैं। जो इस रकम को ना दे पाए उसे वह गरीब मान लेते हैं। जेठमलानीजी ने केजरीवालजी को गरीब घोषित कर दिया है। 22 लाख रुपये फीस ना देनेवाले अगर गरीब हैं तो इस मुल्क की 99 परसेंट आबादी गरीब ही मानी जाएगी। इसे गरीबी की राम (जेठमलानी) रेखा या गरीबी की रोल्स रॉयस रेखा भी कहा जा सकता है।
आईपीएल 2017 शुरू, फूं-फां, शूं-शां, डांस-कमाल-धमाल-बवाल-सवाल सब साथ हैं।
मतलब आप देखें इतना बड़ा शो, इतनी पब्लिसिटी और हद यह है कि आईपीएल में बने रेकॉर्ड्स की कोई आधिकारिक मान्यता नहीं, किसी प्लेयर के लिए ये रेकॉर्ड भविष्य का चैलेंज ना पेश करते। कोई मान्यता नहीं, किसी भविष्य वाले के लिए चैलेंज नहीं, आईपीएल है या अभिषेक बच्चन की फिल्म।
कई फिल्मों के संदर्भ बदल जाएंगे- फिल्मों में नायिकाएं अपने पिता से गुहार लगाती दीखेंगी- पापा एक बार मिल तो लो, राहुल से, वह गरीबी रेखा से नीचे वाला गरीब नहीं है। वह राम (जेठमलानी) रेखा वाला गरीब है। पापा वह बलराज साहनी जैसा पुराने टाइप का गरीब नहीं है, वह शाहरुख खान टाइप नॉन रेजिडेंट इंडियन राम (जेठमलानी) रेखा से ऊपर उठा हुआ गरीब है।
वैसे, पचास हजार रुपये के फोन वाला ऐपल के एक लाख के फोन को देखकर गरीब महसूस करने लगता है। हालांकि ऐपल वाला भी गरीब सिद्ध हो जाए अगर उसके पास सुनवाई की फीस के बदले 22 लाख रुपये देने की रकम ना हो। यानी भारत भूमि पर अमीर कोई नहीं है। अगर कोई अमीर फील कर रहा हो तो चेक कर लें कि क्या प्रति सुनवाई 22 लाख रुपये देना अफोर्ड कर सकता है।
केजरीवालजी देश बदलने आए थे। अब इस बदलाव पर प्रतिबद्ध हो गए हैं कि सरकारी नियमों में हर बदलाव कर दिया जाए जिससे जेठमलानीजी को प्रति सुनवाई 22 लाख रुपये देने की व्यवस्था हो सके। मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है। कम से कम कुछ वकील तो बहुत ही आगे बढ़ गए हैं। मोदी सरकार चाहे तो इस पूरे वाकये का इश्तहारी यूज भी कर सकती है।
-आलोक पुराणिक

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