अब पंजाब के सरकारी कर्मचारी बोले, हमारे साथ नेताओं का भी हो डोप टेस्‍ट

नई दिल्ली। पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए डोप टेस्‍ट अनिवार्य करने के बाद कर्मचारी संगठन भी मुखर हो गए हैं।
उन्‍होंने कहा है कि मुख्‍यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, सांसदों सहित नेताओं के भी डोप टेस्‍ट जरूरी किए जाएं। सीएम अमरिंदर सिंह ने बुधवार को नई भर्ती सहित सभी कर्मचाारियों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य कर दिया। इस तरह राज्‍य में युवाओं की लगातार मौत और ड्रग्स की तस्करी के कारण फजीहत के बीच सरकार ने नशे पर एक और वार किया है। कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद भी सेवा के दौरान हर स्तर पर कर्मचारियों का डोप टेस्ट होगा। प्रमोशन के समय भी डोप टेस्‍ट किया जाएगा।
ड्रग तस्करों को फांसी की सजा देने के प्रावधान के प्रस्ताव के बाद मुख्‍यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह दूसरा बड़ा कदम उठाया है। पंजाब में पिछले 33 दिनों में नशे से 42 युवाओं की मौत हो चुकी है। कर्मचारी संगठनों ने इस कदम का स्‍वागत किया है लेकन इसके साथ ही कहा है मुख्‍यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और विधायकों का भी डोप टेस्‍ट होना चाहिए।
सरकार के इस कदम के बाद कर्मचारी संगठनों ने भी मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि मुख्‍यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी प्रधानों के साथ विभिन्‍न पार्टियों के कार्यकर्ताओं को भी इस व्‍यवस्‍था में शामिल किया जाना चाहिए। पंजाब सिविल सेक्रेट्रिएट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष एस के खैहरा ने कहा कि हमें कर्मचारियों के डोप टेस्‍ट पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हमारी मांग है कि वह इस बारे में नोटिफिकेशन में सीएम, मंत्रियों, विधायकों, पार्टी के प्रधानों व उनके कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाए। उन्‍होंने कहा कि कर्मचारियों का डोप टेस्‍ट होगा तो फिर इन लोगों को इससे छूट क्‍यों हो। कर्मचा‍री नेताओं के रुख से राज्‍य में सरकार के इस कदम से माहौल गर्माने के आसार हैं।
बता दें कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को पुलिस व अन्य सरकारी कर्मचारियों की नई भर्ती व प्रमोशन में डोप टेस्ट अनिवार्य करने का आदेश दिया। इसके साथ ही पुराने सरकारी मुलाजिमों का सालाना डोप टेस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने चीफ सेक्रेटरी करण अवतार सिंह को इस संबंध में आवश्यक अधिसूचना जारी करने के आदेश दिया।
नशा तस्करों के लिए मौत की सजा का प्रस्ताव पास के बाद मुख्यमंत्री ने यह एक और कड़ा फैसला किया है। पहले चरण में इसे भर्ती और प्रमोशन में लागू किया जाएगा। पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने जून 2016 में पुलिस मुलाजिमों की भर्ती के दौरान डोप टेस्ट अनिवार्य किया था। इस दौरान सरकार ने 3.76 लाख युवकों का डोप टेस्ट किया था। इनमें से 1.27 फीसद युवकों का डोप टेस्ट पॉजीटिव पाया गया था।
कांग्रेस सरकार ने अब इसे पुलिस मुलाजिमों समेत सभी सरकारी मुलाजिमों पर लागू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने यह फैसला पिछले एक माह से ड्रग्स के कारण हो रही मौतों व उसके कारण लोगों में बढ़ रहे गुस्से को देखते हुए लिया है।
अहम पहलू यह है कि पुलिस मुलाजिमों पर आमतौर पर नशा करने के आरोप लगते रहते हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस मुलाजिमों को भी डोप टेस्ट में शामिल करने का फैसला किया है। अभी तक डोप टेस्ट अनिवार्य नहीं था। अकाली सरकार ने केवल पुलिस मुलाजिमों की भर्ती में ही इसका प्रयोग किया था जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसे अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
इससे पहले सोमवार को नशा तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ड्रग तस्करों को फांसी की सजा देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। यदि केंद्र इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो प्रदेश में नशे का धंधा करने वालों पर कड़ी नकेल कसी जा सकेगी।
पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को जेल में डालने की नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा की मांग पर कैप्टन ने उन्हें चुनौती दी है। कैप्टन ने आप नेताओं के साथ हुई मुलाकात में कहा, ‘यदि आपके पास कोई सबूत है तो मुझे दो। 5 मिनट में मजीठिया को अंदर कर दूंगा, लेकिन बिना सुबूतों के न आपके खिलाफ और न ही किसी और खिलाफ कार्रवाई होगी। यदि मजीठिया किसी भी मामले में दोषी पाए गए तो उन्हें बक्शा नहीं जाएगा।’
कैप्टन ने कहा, ‘ड्रग्स मामले में तो सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ भी आरोप हैं। अदालत ने उन्हें समन भी किया गया था। ड्रग्स मामले की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही है। खैहरा का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए राजनीतिक बयानबाजी करने की जगह सबूत दो।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं जब पहली बार मुख्यमंत्री बना था, तब मैंने ही बादल को अंदर किया था लेकिन सुबूतों की कमी कारण वह बच गए थे। आप भरोसा रखो, सुबूत मिलने पर सख्त कार्यवाही होगी।’
उधर बठिंडा जिले के रामपुरा के थाना सिटी एसएचओ बिक्कर सिंह और मुंशी जसपाल सिंह को 50 हजार रुपये रिश्वत लेकर नशा तस्कर छोड़ने के आरोप में बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ थाना रामपुरा में ही भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया। कोर्ट ने दोनों को एक दिन के रिमांड पर भेज दिया है।
डीएसपी फूल जसविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें मंगलवार सूचना मिली कि थाना रामपुरा की सिटी पुलिस ने गांधी नगर निवासी कुलदीप सिंह को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था, लेकिन एसएचओ बिक्कर सिंह और मुंशी जसपाल सिंह ने पचास हजार रुपये रिश्वत लेकर उसे बिना कार्यवाही के ही छोड़ दिया।
-एजेंसी

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