अब अमेरिकी सैनिकों की ड्रेस, रायफल और हेलमेट पहनकर प्रॉपेगैंडा फैलाने में जुटे हैं तालिबान के आतंकी

काबुल। अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान के आतंकी अब प्रॉपेगैंडा फैलाने में जुट गए हैं। तालिबान ने हाल में ही एक तस्वीर जारी की है, जिसमें कई आतंकी इवो जीमा पर अमेरिकी ध्वज उठाने वाले सैनिकों की प्रसिद्ध द्वितीय विश्व युद्ध की तस्वीर का मजाक उड़ाते दिखाई दे रहे हैं। 1945 की मूल तस्वीर में अमेरिकी सेना के छह मरीन के एक समूह ने जापान के सुरीबाची पर्वत पर अमेरिकी झंडा फहराया था। यह तस्वीर आज भी अमेरिकी सेना के बहादुरी का प्रतीक मानी जाती है।
तालिबान के बद्री 313 यूनिट के हैं ये आतंकी
इस घटना का मजाक उड़ाते हुए तालिबान के बद्री 313 बटालियन के आतंकी अपने झंडे को फहराते दिखाई दे रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इन आतंकियों ने अमेरिकी सैनिकों की ड्रेस, उनकी रायफल, हेलमेट और दूसरे गियर पहने हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये उपकरण काबुल में तैनात नाटो सैनिकों से चुराए हुए हैं। पहली नजर में ये आतंकी किसी देश की स्पेशल फोर्सेज के कमांडो की तरह दिखाई देते हैं।
तालिबान की स्पेशल फोर्स है बद्री 313
बद्री 313 तालिबान लड़ाकों की स्पेशल फोर्स है। ये आतंकी अमेरिकी सैनिकों की तरह कैमोफ्लाज जूते, बॉडी आर्मर और कपड़े पहनते हैं। इतना ही नहीं, ये आतंकी हाथ में अमेरिकी एम-4 रायफल लिए हम्वी गाड़ी से गश्त लगाते हैं। तालिबान ने अपने इस कमांडो यूनिट का बद्री 313 नाम बद्र की लड़ाई के नाम पर रखा है। कुरान में बताया गया है कि लगभग 1400 साल पहले पैगंबर मोहम्मद ने 313 लड़ाकों के साथ दुश्मन सेना को सफलतापूर्वक हराया था।
हथियार और गियर कैसे मिले, पता नहीं
तालिबान की इस यूनिट ने कहां से अमेरिकी सैनिकों का गियर और हथियार पाया है, वह अभी अज्ञात है। देखने में यह हूबहू अमेरिकी सेना के हार्डवेयर से मेल खाता है। पहले अफगान सेना भी ऐसे ही उपकरणों का इस्तेमाल करती थी, लेकिन बाद में उनसे अमेरिकी और बाकी नाटो फोर्सेज ने वापस ले लिया था।
इन आतंकियों की ड्रेस तो देखिए
तालिबान के जारी वीडियो में बद्री 313 के आतंकी अपनी सामान्य पगड़ी की जगह सैन्य हेलमेट और धूप के चश्में पहने दिखाई दे रहे हैं। ये आतंकी पतलून और क्लाश्निकोव रायफल की जगह कैमोफ्लाज जैकेट और बूलेटप्रूफ वेस्ट पहने हुए हैं। यह यूनिट अत्याधुनिक रायफलों से लैस भी दिखाई देती है। इन्होंने लड़ाई में इस्तेमाल किए जाने वाले स्पेशल जूते पहने हैं और हेलमेट पर नाइट विजन गॉगल्स भी लगाए हुए हैं।
तालिबान के पास बिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद करीब 28 बिलियन डॉलर के हथियारों को जब्त किया है। ये हथियार अमेरिका ने 2002 और 2017 के बीच अफगान बलों को दिया था। एक अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जो हथियार नष्ट नहीं हुए हैं वे अब तालिबान के कब्जे में हैं।
तालिबान के लिए स्टेटस सिंबल हैं ये लड़ाके
सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसीज सिक्योरिटी असिस्टेंस मॉनिटर के डिप्टी डायरेक्टर इलियास यूसुफ का कहना है कि अमेरिकी हथियारों की जब्ती तालिबान के लिए एक प्रचार का मामला है। तालिबान आतंकी अफगान वायु सेना के जहाजों और हेलिकॉप्टरों के साथ तस्वीरें तो ले रहे हैं, लेकिन इनके पास इसे चलाने की ट्रेनिंग नहीं है। उन्होंने कहा कि जब एक सशस्त्र समूह अमेरिकी निर्मित हथियारों पर अपना हाथ रखता है, तो यह एक स्टेटस सिंबल की तरह होता है। यह एक मनोवैज्ञानिक जीत है।
इवो जीमा पर अमेरिकी झंडा क्यों फहराया गया था?
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान छह यूएस मरीन ने 23 फरवरी 1945 को इवो जीमा में एक पहाड़ी पर जीत के बाद अपना झंडा फहराया था। माउंट सुरिबाची इवो जिमा की सबसे ऊंची चोटी थी और संभवत यह द्वीप के हर कोने से दिखाई देती थी। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों ने झंडा फहराकर दुश्मन सेना को एक मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश की थी। एसोसिएटेड प्रेस फोटोग्राफर जो रोसेन्थल ने इस तस्वीर को लिया था।
-एजेंसियां

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