अब महंगा पड़ेगा Zomato और Swiggy से खीने-पीने की चीजें मंगाना

Zomato और Swiggy जैसे फूड डिलीवरी एप से खीने-पीने की चीजें मंगाना महंगा पड़ेगा। फूड डिलीवरी एप की सेवाओं को GST के दायरे में लाया गया है। 17 सितंबर को लखनऊ में जीएसटी परिषद की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इससे फूड डिलीवरी एप से खाने-पीने की चीजें मंगाने के लिए आपको ज्यादा पैसे देने होंगे।
शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक में फूड डिलीवरी एप (जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियां) की सेवाओं पर एक जनवरी, 2022 से 5 प्रतिशत जीएसटी वसूलने का निर्णय किया गया। कोरोना शुरू होने के बाद से यह आमने-सामने जीएसटी काउंसिल की होने वाली पहली बैठक थी। इस तरह की आखिरी बैठक 20 महीने पहले 18 दिसंबर 2019 को हुई थी। उसके बाद से परिषद की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ही हो रही थी।
हालांकि शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल को फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं लाने का निर्णय किया। बैठक में रेस्तरां सेवा प्रदाता और यात्री परिवहन से जुड़े ई-वाणिज्य मंचों पर कर लगाने का फैसला किया गया। साथ ही, कोविड-19 के उपचार से संबंधित दवाओं (medicines) पर रियायती कर की दरों की समयसीमा तीन माह बढ़ाकर 31 दिसंबर 2021 करने का निर्णय किया गया है।
जीएसटी पर निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय जीएसटी परिषद की यहां हुई 45वीं बैठक में पेट्रोल और डीजल को फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं लाने का फैसला किया गया है। इसकी वजह यह बताई गई है कि मौजूदा उत्पाद शुल्क और वैट (मूल्य वर्धित कर) को समाहित कर दिये जाने से राजस्व पर असर पड़ेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। बैठक में लिये गये निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘‘जीएसटी परिषद का मानना है कि यह पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने का यह सही समय नहीं है।’’
सीतारमण के अनुसार परिषद ने कोविड-19 के उपचार से संबंधित कुछ दवाओं पर रियायती कर की दरों को जारी रखने की समयसीमा को तीन महीने यानी 31 दिसंबर तक बढ़ाने का भी फैसला किया। हालांकि, यह लाभ चिकित्सा उपकरण के मामले में नहीं दिया जाएगा। कुछ चिकित्सा उपकरण पर रियायती कर की व्यवस्था 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगी।
-एजेंसियां

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