अब स्मारक और पार्क बनवाने से मायावती ने की तौबा, रहेगा विकास पर फोकस

लखनऊ। यूपी में ब्राह्मण वोट साधते हुए बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने विधानसभा चुनाव के लिए आगाज कर दिया है। मायावती ने बीएसपी के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के पहले चरण के समापन के दौरान लखनऊ में पार्टी कार्यालय में लंबा-चौड़ा भाषण दिया। मायावती ने इस दौरान कई अहम बातें कहीं, उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर पांचवी बार सरकार बनी तो स्मारक बनवाने के बजाय विकास पर ध्यान देंगी।
मायावती ने पार्क, स्मारक को लेकर क्या कहा?
मायावती ने अपने संबोधन में कहा, ‘ऐसे जो संत गुरु महात्मा हुए जिन्होंने इस देश को समता मूलक समाज बनाने का प्रयास किया, मैंने अपनी पिछली चार सरकारों में उनके आदर सम्मान में दिल्ली के नजदीक नोएडा में और यूपी की राजधानी लखनऊ में स्मारक, संग्रहालय, पार्क और मूर्तियां वगैरह स्थापित कीं। जो हमें काम करना था हमने अपनी पिछली सरकारों में पूरा कर दिया। अब हमें फिर से कोई नया स्मारक या पार्क या मूर्ति लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मैंने थोक के भाव काम कर दिया है। अब आगे पांचवी बार जब बीएसपी की सरकार बनेगी मेरी पूरी ताकत यूपी की तस्वीर बदलने में लगेगी।’
जनता के करोड़ों रुपये फूंकने का आरोप
दरअसल मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने लखनऊ और नोएडा में दलित नेताओं के कई स्मारक, हाथी की मूर्तियां और पार्क बनवाए और आरोप लगा कि इस दौरान उन्होंने जनता के करोड़ों रुपये फूंक दिए। इसके चलते मायावती की काफी आलोचना भी होती रही है। 2019 में इससे जुड़े एक मामले में टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मायावती के शासनकाल में पार्कों और मूर्तियों में जो पैसा खर्च हुआ है उसे सरकारी खजाने में लौटाना चाहिए।
अखिलेश सरकार में हुई थी जांच
मायावती के शासनकाल के बाद जब 2012 में अखिलेश यादव सरकार बनी तो स्मारकों में घोटाले के अंदेशे से जांच कराई गई थी। एलडीए की जांच में सामने आया था कि लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों और स्मारकों पर कुल 5,919 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। जांच में यह भी कहा गया था कि इन पार्क और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी लगाए गए थे।
लखनऊ में 7 और नोएडा में 3 पार्क बनवाए
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका के मुताबिक मायावती ने अपने शासनकाल में लखनऊ में 7 और गौतमबुद्ध नगर में 3 पार्क बनवाए थे। इसके लिए करीब लगभग 750 एकड़ जमीन इस्तेमाल की गई थी। मायावती की मूर्तियों पर 3.49 करोड़, कांशीराम की मूर्तियों पर 3.37 करोड़ और 60 हाथियों पर 52.02 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हाथी बीएसपी का चुनाव चिह्न भी है। चुनाव के दौरान आयोग हाथियों को पॉलिथीन से ढकवा भी चुका है।
रखरखाव के लिए 5,788 कर्मचारी लगाए गए
बीएसपी सुप्रीमो मायावती के शासनकाल में बनवाए गए पांच स्मारकों और हाथियों की सुरक्षा व रखरखाव पर हर साल 180 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। स्मारकों के रखरखाव और सुरक्षा के लिए 5,788 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि यूपी संस्कृति विभाग का 90 फीसदी बजट माया, कांशीराम और हाथियों की मूर्तियों की स्थापना में खर्च हुआ।
कभी सूंड़ ऊपर करनी पड़ी तो कभी ढके गए हाथी
स्मारकों में लगी हाथी की मूर्तियां बीएसपी के लिए मुसीबत ही बनते रहे हैं। चुनाव आयोग से लेकर कोर्ट तक ने कई बार इस पर निर्देश दिए। मायावती को इन मूर्तियों को बचाए रखने की तरकीब निकालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी है। कभी सूंड ऊपर करनी पड़ी तो कभी उन्हें ढका गया। इस पर भी काफी राशि इस्तेमाल की गई।
कहां-कहां कितने पैसे से बना पार्क और मूर्तियां
लखनऊ में
आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतीक स्थल
क्षेत्रफल- 125 एकड़
लागत- 1363 करोड़ रुपये
कांशीराम मेमोरियल
एरिया- 70 एकड़
लागत- 730 करोड़ रुपये
रमाबाई रैली स्थल
एरिया- 51 एकड़
लागत- 655 करोड़ रुपये
बुद्ध शांति उपवन
एरिया- 10.8 हेक्टेयर
लागत- 460 करोड़
कांशीराम ईको पार्क
एरिया- 70 एकड़
लागत – 1000 करोड़ रुपये
गोमती विहार पार्क
एरिया- 30 एकड़
लागत- 300 करोड़ रुपये
गोमती पार्क
एरिया- 20 एकड़
लागत- 200 करोड़
नोएडा
राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल ऐंड ग्रीन गार्डन
एरिया- 80 एकड़
लागत- 685 करोड़ रुपये
आंबेडकर पार्क, बादलपुर, ग्रेटर नोएडा
एरिया- 10 हेक्टेयर
लागत- 96 करोड़ रुपये
बुद्ध पार्क, बादलपुर, ग्रेटर नोएडा
एरिया-4 हेक्टेयर
लागत- 46 करोड़ रुपये
पार्कों की संख्या
लखनऊ- 7
जीबी नगर- 3
हाथी की मूर्तियां
लखनऊ- 152
नोएडा- 56
मूर्तियों में लागत- 99.84 रुपये करोड़
एफआईआर के अनुसार, एक मूर्ति की लागत- 48 लाख रुपये
-एजेंसियां

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