अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जावेद, कहा कि हिंदू दुनिया में सबसे सहिष्णु

अफगानिस्तान में तालिबान के आतंकी जब बंदूक के दम पर सत्ता पर काबिज हुए तो भारत में उनके कुछ हमदर्द निकल आए। टीवी पर डिबेट होने लगी, सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़क उठा, ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। तब मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख्तर सामने आए और तालिबान का समर्थन करने वालों को खूब खरी-खोटी सुनाई। हालांकि तालिबान विरोध के चक्कर में वह इस आतंकी संगठन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना करने की ‘भूल’ कर बैठे। फिर क्या था, कुछ ही घंटों में वह देश के लाखों-करोड़ों संघ के स्वयंसेवकों के निशाने पर आ गए। अब उन्होंने सामना में लेख लिखकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। उन्होंने हिंदुओं को दुनिया का सबसे बड़ा सहिष्णु समुदाय बताया है। आइए एक-एक कर पूरे मामले को समझते हैं।
जावेद अख्तर ने कहा क्या था, जिस पर हुआ बवाल
दरअसल, जावेद अख्तर ने कहा था कि RSS, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों का भी उद्देश्य वही है, जो तालिबान का है। वह कहते-कहते यह भी बोल गए कि भारत का संविधान इनके लक्ष्य की राह में आड़े आ रहा है, अगर इन्हें मौका मिला तो उस बाउंड्री को भी पार कर जाएंगे।
तालिबान की हुकूमत आने से गदगद कुछ भारतीय मुस्लिमों की आलोचना करने वाले जावेद अख्तर ने कहा कि दुनियाभर में राइट विंग एक है। भारत में भीड़ द्वारा अल्पसंख्यकों की पिटाई की घटनाओं पर अख्तर बोल गए कि यह पूरी तरह से तालिबान बनने का एक तरह से फुल ड्रेस रिहर्सल है। ये एक ही लोग हैं, बस नाम अलग है।
जावेद अख्तर ने कहा कि जो लोग आरएसएस, वीएचपी, बजरंग दल जैसे संगठनों का समर्थन करते हैं, उन्हें आत्मचिंतन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर तालिबान मध्ययुगीन मानसिकता वाला है, वे बर्बर हैं लेकिन आप जिन्हें समर्थन कर रहे हैं, वे उनसे अलग कहां हैं?
भाजपा और संघ के समर्थक बरस पड़े
जैसे ही जावेद अख्तर का इंटरव्यू सामने आया बीजेपी, आरएसएस के करोड़ों समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। मुंबई में उनके घर के बाहर बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई शहरों में पुतले भी फूंके गए। ट्विटर पर जावेद अख्तर के खिलाफ मीम्स बनने लगे और देशभर में यह चर्चा का विषय हो गया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कहा कि अच्छा होगा कि जावेद अख्तर माफी मांग लें।
टीवी डिबेट का विषय भी ‘तालिबान के हमदर्द’ से हटकर जावेद अख्तर हो चुके थे। उनके पुराने बयानों और विवादों की चर्चा शुरू हो गई। बीजेपी विधायक राम कदम ने कह दिया कि जब तक जावेद अख्तर हाथ जोड़कर माफी नहीं मांग लेते, उनकी किसी भी फिल्म की भारत में स्क्रीनिंग नहीं होने देंगे।
जब शिवसेना के निशाने पर आए जावेद
बीजेपी केंद्र की सत्ता में है पर शायद जावेद अख्तर को लग रहा था कि महाराष्ट्र में उन्हें कोई टेंशन नहीं होगी क्योंकि यहां भाजपा से दोस्ती तोड़ने वाली शिवसेना की सरकार है। पर वह भूल गए कि दोनों की विचारधारा में काफी समानताएं हैं। जल्द ही शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में जावेद अख्तर को नसीहत दे डाली। सामना में कहा गया, ‘RSS और तालिबान की तुलना करना ठीक नहीं है… लगातार बहुसंख्यक हिंदुओं को दबाया न जाए।’
सामना में तालिबान और संघ के बारे में लिखा गया, ‘अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हिंदुस्तान की मानसिकता वैसी नहीं है। हम हर तरह से सहिष्णु हैं… जावेद अख्तर अपने मुखर बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों की परवाह किए बगैर वंदे मातरम गाया है, फिर भी तालिबान से संघ की तुलना स्वीकार नहीं है।’ हिंदुत्व विचार, रामायण-महाभारत की बात कर शिवसेना ने जावेद अख्तर को जमकर सुनाया और तालिबान की हकीकत सामने रखकर उनके बयान को गलत ठहराया।
बीजेपी ने शिवसेना को घेरा
सामना में यह लेख आया तो बीजेपी ने शिवसेना को घेरना शुरू कर दिया। बीजेपी विधायक राम कदम ने कहा कि जलेबी की तरह गोल-गोल भाषा। उन्होंने कहा कि जब शिवसेना कह रही है कि जावेद अख्तर का बयान गलत है तो उन्हें अबतक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
जावेद अख्तर ने गलती सुधारी!
जावेद अख्तर ने अब कहा है कि तालिबान शासित अफगानिस्तान की तुलना भारत से कभी नहीं हो सकती। तालिबान को बर्बर कहने वाले गीतकार ने भारतीयों को नरम विचारधारा वाला बताया है। अपनी बात को कहने के लिए उन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। जावेद अख्तर ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में ही लेख लिखकर गलती सुधारने की कोशिश की है, जिससे बीजेपी, संघ के साथ-साथ शिवसेना की नाराजगी भी दूर की जा सके। उनके लेख को पढ़ने से ऐसा लगता है कि उन्होंने शिवसेना की बातों को कबूल किया है।
उन्होंने यह भी लिखा है कि भारत, अफगानिस्तान कभी नहीं बन सकता। ‘सामना’ में लिखे लेख में जावेद अख्तर ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की तारीफ की है।
गौर करने वाली बात है कि जावेद अख्तर ने संघ-VHP की बात करने की बजाय सीधे तौर पर सभी हिंदुओं को सहिष्णु बता दिया, जिससे उनके पिछले बयान को लेकर विवाद अब शांत हो सके।
-एजेंसियां

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