इतना आसान भी नहीं है उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण

सोल। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मंगलवार को सिंगापुर में बहुप्रतीक्षित शिखर बैठक होने वाली है। उत्तर कोरिया ने परमाणु निस्त्रीकरण का ऐलान कर रखा है लेकिन उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण इतना आसान भी नहीं है। इस रास्ते में कई चुनौतियां हैं। उत्तर कोरिया के पास कई परमाणु बम हैं, जिनकी निश्चित संख्या के बारे में सिर्फ अंदाज ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा उसके पास प्लूटोनियम और यूरेनियम जैसे रेडियोऐक्टिव तत्वों का जखीरा है। अंतरमहाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसी कई घातक मिसाइले हैं। उत्तर कोरिया की हथियार फैक्ट्रियों में वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया के ‘पूर्ण परमाणु-निरस्त्रीकरण’ में लंबा वक्त लगेगा।
उत्तर कोरिया कह चुका है कि अगर अमेरिका उसे सुरक्षा का भरोसामंद आश्वासन और कुछ दूसरे फायदे देता है तो वह अपने परमाणु जखीरे को पूरी तरह खत्म कर देगा। हालांकि मंगलवार को होने वाली ट्रंप-किम शिखर बैठक से पहले उत्तर कोरिया के वादे को संदेह की नजर से देखा जा रहा है कि वह क्या इतनी आसानी से उन परमाणु हथियारों को नष्ट कर देगा, जिसे बनाने की वजह से उसे तमाम अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा।
उत्तर कोरिया के लिए अपने कुछ परमाणु बमों और रेडियोऐक्टिव पदार्थों में से कुछ को छिपाना कोई मुश्किल काम नहीं है क्योंकि वह अपने यहां तमाम गुप्त तहखाने बना रखे हैं। उत्तर कोरिया के परमाणु जखीरे का आकार एक रहस्य है। अनुमान के मुताबिक उसके पास 10 से लेकर 60-70 तक परमाणु बम हो सकते हैं। परमाणु तकनीक में वे कितने पारंगत है, यह भी अस्पष्ट है। परमाणु परीक्षण करना एक बात है और परमाणु बमों को लंबी रेंज वाली मिसाइलों पर फिट करके सटीक निशाना बनाना दूसरी बात है। उत्तर कोरिया ने 2006 के बाद से 6 बार भूमिगत विस्फोट कर चुका है, इनमें से 2 के बारे में तो वह हाइड्रोजन बम के परीक्षण का दावा किया है।
किम ने पिछले नवंबर में कहा था कि उनका देश परमाणु तकनीक में एक्सपर्ट है और तमाम विदेशी विशेषज्ञ व सरकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया परमाणु तकनीक में पूर्ण पारंगत हो या न हो, लेकिन कम से कम उस दिशा में बढ़ जरूर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में सीआईए के तत्कालीन डायरेक्टर माइक पोम्पियो ने कहा था कि उत्तर कोरिया अमेरिका तक मिसाइल से हमले की क्षमता के करीब पहुंच चुका है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपनी उन कम दूरी की मिसाइलों पर परमाणु हथियार फिट करने में सक्षम है, जो दक्षिण कोरिया और जापान तक पहुंच सकती हैं। दक्षिण कोरिया और जापान में करीब 80,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। परमाणु बम को प्लूटोनियम या अति समृद्ध यूरेनियम से विकसित किया जा सकता है और उत्तर कोरिया के पास इन दोनों का ही जखीरा है। 2016 की दक्षिण कोरिया सरकार की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि उत्तर कोरिया ने 50 किलोग्राम प्लूटोनियम का संवर्धन किया है जो 6 से 10 परमाणु बमों को बनाने के लिए पर्याप्त है। उत्तर कोरिया ने 2007 में न्योंगब्योन में स्थित अपने मुख्य न्यूक्लियर कॉम्पलेक्स में प्लूटोनियम का उत्पादन करने वाली फैक्ट्री को बंद कर दिया था। उस वक्त उसने प्रतिबंधों में ढील के लिए ऐसा किया था लेकिन बाद में समझौता नाकाम हो गया। सैटलाइट तस्वीरों से यह संकेत मिलते हैं कि उत्तर कोरिया ने हाल के सालों में न्योंगब्योन में प्लूटोनियम का उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने हाल में लिखा था कि उत्तर कोरिया के पास 250 किलोग्राम से 500 किलोग्राम तक उन्नत यूरेनियम का भंडार है। इतने यूरेनियम से 25 से 30 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक उत्तर कोरिया ने 10,000 से ज्यादा भूमिगत सुरंग और ढांचा बना रखे हैं। ऐसे में उसके लिए कुछ प्लूटोनियम, यूरेनियम या परमाणु बमों को छिपाना कोई मुश्किल नहीं है।
अमेरिका यह भी चाहेगा कि उत्तर कोरिया अपने निरस्त्रीकरण कार्यक्रम में इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी शामिल करें क्योंकि ये मिसाइलें परमाणु बमों से अमेरिका की मुख्यभूमि को निशाना बना सकते हैं। पिछले साल उत्तर कोरिया ने 3 ICBM का परीक्षण किया था और दावा किया था कि ये सभी परमाणु क्षमता से संपन्न हैं।
मई में उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए अपने इकलौते न्यूक्लियर टेस्ट साइट को नष्ट किया था। हालांकि विदेशी पत्रकारों के एक छोटे से समूह की मौजूदगी में न्यूक्लियर टेस्ट साइट को बंद करना इस बात की गारंटी नहीं देता कि वह फिर से परमाणु कार्यक्रमों की राह नहीं पकड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया के संपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए कई और अहम कदम उठाने की जरूरत है।
-एजेंसी

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