नो टेंशन: भारत के पास 2 महीने से अधिक का तेल स्टॉक

सऊदी अरब में ऑइल प्लांट पर अटैक के बाद तेल को लेकर टेंशन है। सोमवार को तो कच्चे तेल की कीमत में 19 फीसदी तक उछाल आया, जो 1990-91 के खाड़ी युद्ध के बाद एक दिन में सबसे अधिक वृद्धि थी। उस समय भारत के लिए पेमेंट बैलेंस ऐसा बिगड़ा कि आर्थिक सुधारों के लिए मजबूर होना पड़ा। तब भारत के पास महज 3 दिन का ऑइल रिजर्व था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह अलग है। मौजूदा समय में भारत 2 महीने से अधिक समय तक बिना तेल आयात अपना काम चला सकता है।
आखिर क्या बदल गया है?
एक तरफ भारत की आर्थिक स्थिति (430 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार) बदली है, जो अब कीमतों में तेजी का सामना अधिक मजबूती से कर सकता है तो दूसरी तरफ तेल स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर है। यह तेल आपूर्ति में कमी के टेंशन से देश को राहत देता है। बता दें, भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है।
कितने दिन का है रिजर्व?
भारत में रिफाइनरीज के पास आमतौर पर 60 दिनों का स्टॉक रहता है। आपूर्ति बाधा के दौरान रिफाइनरीज में क्रूड के बहाव को जारी रखने के लिए भारत के पास विशाल भूमिगत तेल भंडारण क्षमता भी है। इन्हें स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPRs) कहा जाता है। भारत के पास मौजूद तीन भूमिगत तेल भंडार में 10 दिनों के लायक क्रूड स्टोर होता है। ऐसे दो और भंडार विकसित किए जाएंगे, जिनमें 12 अतिरिक्त दिनों के लिए क्रूड स्टोर होगा। यह काम पूरा हो जाने के बाद भारत के पास 82 दिनों के लिए क्रूड स्टोरेज होगा। अमेरिका, जापान, चीन, यूके और ईयू जैसे देशों के पास भी इस तरह के तेल भंडार हैं।
कहां है तेल?
भारत के पास तीन भूमिगत भंडार गृह हैं, जिन्हें आम बोलचाल में तेल की गुफाएं भी कहा जाता है। इनमें 53.3 लाख टन क्रूड स्टोर हो सकता है। विशाखापत्तनम में मौजूद गुफा में 13.3 लाख टन क्रूड भरा है। मेंगलुरु स्टोरेज में 15 लाख टन क्रूड के लिए डील हो चुकी है। कर्नाटक के पादुर में 25 लाख टन क्षमता का भंडार तैयार है, लेकिन इसे तेल का इंतजार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 53 लाख टन स्टोरेज क्षमता का 55 फीसदी हिस्सा तेल से भरा हुआ है। भारत अतिरिक्त 65 लाख टन क्षमता के लिए ओडिशा और पादुर में दो गुफा बनाने की तैयारी में है।
किसका है तेल?
इन भूमिगत भंडारों को तेल से भरने के लिए पिछले साल भारत ने विदेशी तेल कंपनियों से दो समझौते किए। पादुर भंडार को अबु धाबी नैशनल ऑइल कंपनी (ADNOC) को लीज पर दिया गया तो मैगलोर स्टोरेज को आधा भरने के लिए समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत ADNOC को यहां स्टोर किए गए तेल को स्थानीय रिफाइनरीज को बेचने का अधिकार है, लेकिन आपात स्थिति में इस पर पहला अधिकार भारत सरकार का होगा। विदेशी कंपनियों को तेल स्टोर करने की अनुमति से केंद्र सरकार के 10 हजार करोड़ रुपये बचेंगे।
कीमतों में उछाल का असर तो होगा
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक (भारत) प्रभावित नहीं होगा। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को बजट (5 जुलाई) के बाद से सर्वाधिक उछाल आया। पेट्रोल 14 पैसे महंगा होकर 72.17 रुपये प्रति लीटर हो गया तो डीजल 15 पैसे की वृद्धि के बाद 65.58 रुपये प्रति लीटर हुआ। निवेशक कीमतों में वृद्धि को सरकार के बहीखाते के लिए खतरा मानते हैं। विशेषकर यह आर्थिक सुस्ती को और बदतर कर सकता है। बीएसई सेंसेक्स मंगलवार को 642 अंक (1.73%) गोता लगाकर 36,481 पर बंद हुआ तो एनएसई का निफ्टी 186 अंक (1.69%) नीचे 10,817 पर बंद हुआ।
-एजेंसियां

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