अफवाह और झूठ फैलाने का अधिकार किसी को नहीं, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर कोड ऑफ एथिक्स और रेगुलेशन जारी

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर कोड ऑफ एथिक्स और रेगुलेशन जारी किए। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों का अनुपालन करने की बात कही। सरकार ने कहा कि यदि इन नियमों का अनुपालन नहीं किया गया तो सरकार उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगी।
केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि डिजिटल मीडिया या किसी को भी अफवाह और झूठ फैलाने का अधिकार नहीं है। सोशल मीडिया को 2 श्रेणियों में बांटा गया है। एक इंटरमीडरी और दूसरा सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडरी। सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडरी पर अतिरिक्त कर्तव्य है। सरकार जल्द इसके लिए यूजर संख्या का नोटिफिकेशन जारी करेगी।
ये हैं नियम व गाइडलाइन्स
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक शिकायत निवारण तंत्र रखना होगा।
शिकायतों का निपटारा करने वाले ऑफिसर का नाम भी रखना होगा।
ये अधिकारी 24 घंटे में शिकायत का रजिस्ट्रेशन करेगा और 15 दिनों में उसका निपटारा करेगा।
सिगनिफिकेंट सोशल मीडिया को चीफ कम्पलायंस अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। वह भारत में ही रहेगा। वह नियमों के अनुपालन का जिम्मेदार होगा।
एक नोडल कॉन्टेक्ट पर्सन की नियुक्ति भी करनी होगी। वह भी भारत में ही रहेगा। वह 24×7 कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के साथ समन्वय रखेगा।
इसके अलावा सिगनिफेंकट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रेजिडेंट ग्रिवांस ऑफिसर की भी नियुक्ति करनी होगी।
सोशल मीडिया कंपनी को मंथली कम्पलायंस रिपोर्ट पब्लिश करनी होगी। इसमें शिकायतों की संख्या, उस पर क्या कार्यवाही हुई, उनका क्या निपटारा हुआ आदि की जानकारी देनी होगी।
यूजर्स की प्रतिष्ठा से जुड़ी शिकायतें विशेषकर महिलाओं की गरिमा से जुड़े मामलों में जैसे प्राइवेट पार्ट्स की तस्वीर, न्यूडिटी, सेक्सुअल एक्ट की शिकायत के बाद 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना होगा।
टीवी के सेल्फ रेगुलेशन की तर्ज पर ओटीटी प्लेटफॉर्म का सेल्फ रेगुलेशन करना होगा।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को खुद से क्लासिफिकेशन करना होगा- 13 से ऊपर 16 प्लस, एडल्ट कैटेगरी। इनके लिए सेंसर बोर्ड का एथिक्स कोड कॉमन होगा।
कोर्ट के आदेश और सरकार द्वारा पूछा जाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शरारती कंटेट का ओरिजनेटर बताना होगा।
कहां से हुई खुराफात की शुरुआत, उसका पता बताना होगा
फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुराफात की शुरुआत कहां से शुरू हुई, यह अब सोशल मीडिया कंपनी को बताना होगा। सोशल मीडिया पर किसी तरह की खुराफात और आपत्तिजनक पोस्ट पर शिकायत मिलने के बाद यह बताना होगा कि खुराफात की शुरुआत कहां से हुई। गैर कानूनी पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर है तो न केवल उसे हटाना पड़ेगा बल्कि सोर्स भी बताना पडे़गा।
केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार सोशल मीडिया के लगभग सभी प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्‍स और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्‍टार जैसे ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स आएंगे। सरकार की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश तैयार किए जा चुके हैं और जल्द ही उन्हें लागू किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी देते हुए कहा आपत्तिजनक कंटेंट को सबसे पहले किसने पोस्ट या शेयर किया इसकी जानकारी सरकार या न्यायालय द्वारा मांगे जाने पर देना आवश्यक होगा। सरकार आलोचना और असंतोष के अधिकार का स्वागत करती है लेकिन सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं के लिए सोशल मीडिया के दुरुपयोग के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज के लिए मंच का होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हमारे पास कई शिकायतें आईं कि सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्‍वीरें शेयर की जा रही हैं। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के दुरुपयोग का मसला सिविल सोसायटी से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
-एजेंसियां

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