निपाह वायरस को लेकर टेंशन लेने की जरूरत नहीं, केरल तक ही सीमित

नई दिल्ली। निपाह वायरस को लेकर टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस अभी सिर्फ केरल के कोझिकोड तक ही सीमित है। केरल में भी किसी दूसरी जगह यह नहीं फैला है। एक्सपर्ट्स की मानें तो पर्सन टु पर्सन भी निपाह वायरस बहुत तेजी से नहीं फैलता है।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर के के अग्रवाल का कहना है, ‘सरकार से अभी तक कोई अलर्ट नहीं मिला है। ट्रैवल अलर्ट तक नहीं है। इससे साफ है कि डरने वाली बात नहीं है। हालात नियंत्रण में हैं। जिस जगह यह वायरस पाया गया है, वहीं उसे आइसोलेट कर लिया गया है। बाकी राज्यों में भी हालात सामान्य हैं। दिल्ली में तो बिलकुल डरने की जरूरत नहीं है।’
सोशल मीडिया की अफवाह से बचें
केंद्र सरकार ने जो मेडिकल टीम केरल भेजी थी, उसकी शुरुआती जांच में यह बात निकलकर आयी है कि निपाह फिलहाल एक स्थानीय घटना है और फिलहाल इसके दूसरी जगहों पर फैलने का खतरा नहीं है। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल ऐसा लग रहा है कि निपाह एक स्थानीय घटना है। हालांकि कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों ने अपने यहां निपाह का अलर्ट जारी कर दिया है लेकिन ये सभी राज्य यह बात जरूर कह रहे हैं कि केरल में इस बीमारी से निपटने के लिए सरकार की तरफ से प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
केंद्रीय टीम ने कई चमगादड़ों को पकड़ा
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) की एक केंद्रीय टीम केरल के पेरम्ब्रा के उस घर में भी गई जहां इस बीमारी की वजह से सबसे पहले मौत होने की बात सामने आयी थी। इस घर में टीम को एक कुआं मिला जहां से यह परिवार पानी लेता था। उस कुएं के अंदर टीम को कई चमगादड़ मिले। इनमें से कुछ चमगादड़ों को पकड़कर लैब टेस्ट के लिए भी भेजा गया है ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि कहीं ये चमगादड़ ही तो इस बीमारी की वजह नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और NCDC की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
जगह को आइसोलेट करना है बेहतर उपाय
एम्स के माइक्रोबायॉलजी विभाग के एक डॉक्टर ने कहा कि वायरल वाले चमगादड़ के कॉन्टैक्ट में जो लोग आएंगे, उनमें यह फैलेगा। निपाह वायरस की डिटेल्स जुटाने के लिए एम्स के डॉक्टर आशुतोष विश्वास केरल गए हैं। मेडिसिन के एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि यह वायरस 4 से 18 दिन तक शरीर में रह सकता है। तब मरीज को करीब महीने भर आइसोलेशन में रखा जाता है। सफदरजंग के कम्युनिटी मेडिसिन के डॉक्टर जुगल किशोर ने कहा कि सबसे ज्यादा जरूरी है कि जहां पर वायरस पाया गया है, उस जगह को ही आइसोलेट कर दिया जाए। उस एरिया में लोगों की मूवमेंट रोक दें। बीते 18 या 20 दिनों में जो लोग भी ऐसे मिले हैं, जिन्हें फीवर, सिर दर्द, सर्दी-खांसी हो उन्हें अस्पताल जाना चाहिए और अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बतानी चाहिए। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर किसी में यह वायरस होगा तो 90 प्रतिशत केस में 4 दिन में पता चल जाएगा।
अस्पताल स्थिति से निपटने में सक्षम
सफदरजंग के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर राजेंद्र शर्मा ने कहा कि एच1एन1 की वजह से वह ऐसे वायरस के इलाज के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उनके यहां प्रोटेक्शन के सारे उपकरण हैं। मरीज के इलाज के लिए अलग वार्ड भी है। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई अलर्ट नहीं है। वहीं, आरएमएल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर वीके तिवारी ने कहा कि उनकी तैयारी पूरी है। दिल्ली के एम्स, सफदरजंग, आरएमएल, एलएनजेपी, जीटीबी, अपोलो, गंगाराम, फोर्टिस जैसे अस्पताल निपाह से निपटने में सक्षम हैं लेकिन फिलहाल घबराने वाली बात नहीं है।
मरने वाले का चेहरा ढकना जरूरी
निपाह वायरस बेहद खतरनाक है। इतना खतरनाक कि इसकी चपेट में आए शख्स की मौत हो जाए तो उसके चेहरे को ढकना जरूरी है। मृत को गले नहीं लगाना चाहिए। अंतिम संस्कार से पहले नहलाने पर भी सावधानी बरतनी पड़ती है।
2 दिन में कोमा में जाने का खतरा
निपाह वायरस के लक्षण दिखने के 2 दिन में ही पीड़ित कोमा में जा सकता है। कुछ लोगों को तो इंस्फेलाइटिस भी हो जाता है। वायरस ब्रेन में पहुंचकर उसे संक्रमित कर देता है।
इन बातों का रखें ध्यान
– जमीन पर गिरे फलों और दूसरी चीजें खाने से बचें
– सिर दर्द, बुखार, बेहोशी और उल्टी आए तो फौरन डॉक्टर को बताएं
– कभी पीड़ित से मिलना भी पड़े तो बाद में हाथों को अच्छे से धोएं
-एजेंसी

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