उन्‍नाव के प्रेमगंज का कोई भी आदमी कुछ बोलने को तैयार नहीं

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले का ​प्रेमगंज गांव उत्तर भारत के किसी भी अन्य गांव जैसा ही दिखता है.
कुछ कच्चे और पक्के घर, पतली गलियां और गांव के बीच में एक तालाब जिसका पानी अब गंदा हो चुका है.
फ़िलहाल इस गांव में ख़ामोशी पसरी है लेकिन अंदर ही अंदर लोगों में गुस्सा है.
सरकार के ज़रिए अचानक की गई जांच में प्रेमगंज और उसके आस-पास के गांवों के कम से कम 38 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं.
प्रेम गंज उन्नाव की बांगरमऊ तहसील में आता है.
गांव के किनारे अपने घर के बाहर बैठी एक महिला एचआईवी के बारे में पूछे जाने पर गुस्से में जवाब देती हैं, “हमें कुछ नहीं पता. गांव में जाकर पता कर लो.”
प्रेमगंज का कोई भी आदमी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं. शुरुआत में सिर्फ़ एक ही आदमी बोलने को तैयार होता है, और वो हैं गांव के पार्षद सुनील कुमार.
वो कहते हैं, “गांव में कुछ दिनों पहले एक कैंप लगाकर लोगों के ख़ून की जांच की गई. जांच में 38 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए.”
गांव वालों को समझ नहीं आ रहा है कि अचानक इतने लोगों में एचआईवी का संक्रमण कैसे फैल गया.
पुलिस ने राजेंद्र यादव नाम के एक झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया है. राजेंद्र यादव पर ग़ैर इरादतन हत्या का आरोप लगाया गया है.
दावों पर सवाल
राजेंद्र यादव 10 रुपये में लोगों का इलाज करते थे. माना ये गया कि उनके लगाए इंजेक्शन से संक्रमण फैला है.
उन्नाव के ज़िला मजिस्ट्रेट रवि कुमार का कहना है कि एचआईवी संक्रमण की वजह सिर्फ़ सुई ही नहीं है. इसकी और भी वजह हो सकती हैं.
उनका इशारा प्रेमगंज के उन लोगों की तरफ़ था जो ट्रक चलाते हैं या फिर मज़दूरी की तलाश में बड़े शहरों में जाते हैं.
ज़िला मजिस्ट्रेट के बयान से गांव वाले नाराज़ हैं.
ये दोनों ही वजह पार्षद सुनील कुमार के गले नहीं उतर रही हैं.
वे कहते हैं, “प्रेम गंज के बगल में एक और गांव है नसीमगंज. राजेंद्र यादव वहां भी लोगों का इलाज करता था. वहां के लोगों में संक्रमण क्यों नहीं पाया गया?”
उन्होंने आगे कहा, “ट्रक चलाने वाले तो आप को बहुत जगह मिलेंगे. तो क्या ये मान लिया जाए जहां भी ट्रक चालक रहते हैं वहां एचआईवी फैल जाता है?”
‘दोबारा हो खून की जांच’
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी कहा है कि एचआईवी के संक्रमण की कई वजह हो सकती हैं और इस मामले की जांच की जायेगी.
सुनील कुमार चाहते हैं कि लोगों के ख़ून की जाँच दोबारा किसी अच्छे अस्पताल में कराई जाए.
वे बताते हैं, “गांव में कैंप लगाकर आनन-फानन में जांच की गई जो शाम सात बजे तक चली. जब रोशनी कम होने लगी तो मोबाइल फ़ोन की रोशनी में जांच की गई.”
प्रेमगंज के एक 18 वर्षीय युवक को एचआईवी पॉजिटिव घोषित कर दिया गया था. पर जब उसने अपने खून की जांच उन्नाव के जिला अस्पताल में करवाई तो उसे नेगेटिव बताया गया.
सुनील कुमार के अनुसार गांव के लोगों को थोड़ा झटका तो लगा है लेकिन ऐसा नहीं कि किसी पीड़ित का बहिष्कार किया जा रहा है.
वे कहते हैं कि लोगों ने अपना इलाज शुरू करवा दिया है.
उन्होंने कहा, “ये सब बातें ग़लत हैं कि शादियां टूट रही हैं. गांव में 12 फरवरी को एक शादी तय थी और वह होगी.”
-रोहित घोष