सावरकर को भारत रत्न देने के लिए किसी औपचारिक सिफारिश की जरूरत नहीं

नई दिल्‍ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में बीजेपी ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान देने का वादा किया था। लोकसभा में इस संबंध में पूछे गए एक सवाल पर सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। गृह मंत्रालय ने सदन को दी गई जानकारी में वीर सावरकर को भारत रत्न देने को लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन यह साफ किया कि इसके लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं है।
मंत्रालय ने कहा, ‘भारत रत्न सम्मान के लिए अलग-अलग वर्गों की ओर से अकसर सिफारिशें आती रहती हैं, लेकिन इसके लिए किसी औपचारिक सिफारिश की जरूरत नहीं होती। भारत रत्न को लेकर समय-समय पर फैसले होते रहते हैं।’
बता दें कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और हर साल प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से इसके लिए संस्तुति करते हैं। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने घोषणा की थी कि सत्ता में आने के बाद वह वीर सावरकर के नाम की सिफारिश भारत रत्न के लिए करेगी। हालांकि शिवसेना के अलग होने की वजह से महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार नहीं बन पाई।
हिंदुत्व पर अपने विचारों के लिए चर्चित रहे क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर हिंदू महासभा से जुड़े थे। महाराष्ट्र में वीर सावरकार का नाम आदर से लिया जाता है। खासतौर पर हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक दल सावरकर को अपना आदर्श मानते रहे हैं।
सावरकर के पोते ने कहा, इंदिरा गांधी थीं अनुयायी
सावरकर के पोते रंजीत ने शुक्रवार को दावा किया था कि इंदिरा गांधी भी सावरकर की समर्थक थीं। उन्होंने कहा, ‘इंदिरा पाकिस्तान को घुटनों पर लेकर आईं, सेना और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया, परमाणु परीक्षण तक कराया। यह सभी बातें नेहरू और गांधी की विचारधारा के उलट थीं।’
-एजेंसियां

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