राम मंदिर ट्रस्ट में अपनी भूमिका के लिए पीएम से मिलेगा निर्मोही अखाड़ा

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में अहम भूमिका की देने की मांग को लेकर निर्मोही अखाड़ा अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेगा। सोमवार को अखाड़े के साधु-संतों की बैठक में यह फैसला लिया गया। अखाड़े के प्रवक्ता रंजीत लाल वर्मा ने कहा, “राम जन्मभूमि मंदिर में निर्मोही अखाड़े की ऐतिहासिक उपस्थिति है और रामलला को पूजने का अधिकार हमेशा निर्मोही अखाड़े के पास रहा है।”
अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने कहा, मंदिर निर्माण में निर्मोही अखाड़ा सकारात्मक भूमिका निभाएगा। अखाड़े को राम जन्मभूमि न्यास के मॉडल पर मंदिर निर्माण करने पर आपत्ति नहीं है। साथ ही निर्माण में न्यास की कार्यशाला में तराशकर रखे गए पत्थरों का इस्तेमाल करने पर भी कोई ऐतराज नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में शामिल करने को कहा
अयोध्या भूमि विवाद में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े का संबंध रामानंदी वैष्णव संप्रदाय से है। अखाड़ा रामलला की पूजन के अधिकार की मांग करता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को प्रतिनिधित्व देने को कहा था। बैठक में महंत दिनेंद्र दास, सरपंच राजा रामचंद्राचार्य, भगवानदास, मनमोहन दास, नरसिंह दास, धनश्याम दास, सुरेश दास, रामसेवक दास सहित करीब 25 प्रमुख साधु-संत शामिल हुए।
विहिप ने कहा, हिंदू समाज राम मंदिर निर्माण को तैयार
इससे पहले रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के वरिष्ठ नेता मिलिंद परांडे ने कहा था कि राम मंदिर के लिए 60% निर्माण सामग्री और नक्शा तैयार है। विवादित जमीन रामलला को सौंप दी गई है और दूसरी बुनयादी चीजों का हम ख्याल रख रहे हैं। उन्होंने कहा था कि केंद्र अगर व्यवस्था बनाए तो हिंदू समाज तुरंत राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कर सकता है।
सोमनाथ की तर्ज पर बन सकता है ट्रस्ट: सूत्र
सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर के लिए केंद्र सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर ट्रस्ट के निर्माण पर विचार कर सकता है, जो निर्माण कार्य की देखरेख करेगा। सूत्रों ने कहा कि सोमनाथ ट्रस्ट में 6 सदस्य हैं जबकि राम मंदिर ट्रस्ट में सदस्यों की संख्या 14 से 17 के बीच हो सकती है। नया ट्रस्ट संस्कृति मंत्रालय के तहत रजिस्टर्ड होगा। मंत्रालय ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के कामकाज की देखरेख करेगा।
ट्रस्ट में विहिप और बजरंग दल शामिल हो सकते हैं
सूत्र ने यह भी बताया कि केंद्र इस बात पर भी विचार कर रहा है कि नया ट्रस्ट बनाने की जगह, राम जन्मभूमि न्यास में ही बदलाव करके और नए सदस्यों को शामिल किया जाए। इस ट्रस्ट को ही राम मंदिर निर्माण का जिम्मा सौंप दिया जाए। ट्रस्ट के सदस्यों में विहिप और बजरंग दल के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जा सकता है। सदस्य कौन होंगे, इसका फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को सौंपे जाने और मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था।
-एजेंसियां

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