निरंकारी भक्तों ने श्रद्धा समर्पण के साथ मनाया मुक्ति पर्व

मथुरा। निरंकारी भक्तों ने हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर मुक्ति पर्व श्रद्धा समर्पण के साथ मनाया।

प्रवक्ता किशोर “स्वर्ण” ने बताया कि मुक्ति पर्व पर संत निरंकारी मिशन के पूर्व मार्गदर्शकों तथा उन ब्रह्मलीन संतों को याद किया जाता है, जिन्होंने जीवनपर्यन्त भ्रम और अंधविश्वास तथा अज्ञानता के बंधनों में फंसे इंसानों को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर मुक्त किया। आवागमन के चक्रव्यूह से मुक्ति प्रदान की।

निरंकारी मिशन के विश्व व्यापी “मुक्ति पर्व” का असर यहां मथुरा में भी छाया रहा, इस मौके पर आयोजित सत्संग में
मथुरा के जोनल इंचार्ज संतश्री हरविंद्र कुमार ने उन ब्रह्मलीन संतो को नमन किया, जिन्होंने लाखों भटकी रूहों को मुक्ति प्रदान की।

उन्हेंने कहा कि निरंकारी मिशन का लक्ष्य हर मानव को ब्रह्मज्ञान प्रदान करना है। ब्रह्मज्ञान से ही मुक्ति सम्भव है। संत निरंकारी मिशन के सूत्रधार बाबा बूटासिंह जी तथा युगपुरुष बाबा अवतार सिंह जी ने ही सन 1929 में मुक्ति के बीज बोये थे।

जोनल इंचार्ज संतश्री ने बाबा बूटासिंह जी की सत्य के प्रति लगन, युगपुरुष बाबा अवतार सिंह जी के त्याग, जगतमाता बुद्धवंती जी के सेवाभाव, बाबा गुरबचन सिंह जी की दृढ़ता, राजमाता कुलवन्त जी की मर्यादा, बाबा हरदेव सिंह जी के प्रेममय संदेश तथा माता सविन्दर जी के आदर्श को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जहा स्वयं मुक्ति पद को पाया, वहीं लाखो भटकी रूहों को भी ब्रह्मज्ञान प्रदान कर, अंधविश्वास, छुआ-छुट और अज्ञानता के बन्धनों से मुक्त किया। वह मिशन के सन्देश को जन जन तक पहुँचाने के लिये जीवन पर्यन्त समर्पित रहे।

संतश्री हरविंद्र कुमार ने कहा कि जिन संत-महापुरुषों ने सत्य के पथ पर समर्पण भाव के साथ मानव मात्र की सेवा की वह निरंकारी मिशन के रोशन मीनार के रूप में हर हृदय पटल पर अपनी छाप अंकित किए हुए हैं, उनकी कृपा से हमने जीते जी शरीर रहते हुए मुक्ति को पाया है, उनका महान आदर्श और समर्पण आज भी निरंकारी जगत में प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि हम मुक्ति पर्व पर सभी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करें साथ ही साथ उनके जीवन से प्रेरणा लें। वहीं वर्तमान सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के वचनों को मानते हुए, उनके मार्गदर्शन में कंधे से कंधा मिलाकर निरंकारी मिशन का सत्य संदेश जन-जन तक पहुंचाये, सबसे प्यार करें और रोशन मीनार बनें, ताकि अज्ञान का अंधकार कम होता चला जाये और ब्रह्मज्ञान का प्रकाश बढ़ता चला जाये।

इस अवसर पर मोहन सिंह, हरीलाल वर्मा, भरत कुमार, लक्ष्मी निरंकारी, एम एम सहगल, आरती तनवानी, मधु एसके रावत, ओपी सिंह, किशोर स्वर्ण आदि वक्ताओं ने ब्रह्मलीन संतो को याद कर श्रद्धा सुमन अर्पित किये और कहा कि इंसान जन्मता है, मरता है और फिर जन्मता है, इस आवागमन से छुटकारा केवल सद्गुरु ही दिला सकता हैं। बिना सद्गुरु के मुक्ति सम्भव नहीं है। सद्गुरु ही ब्रह्मज्ञान प्रदान करता है और ब्रह्मज्ञान से ही जीते जी मुक्ति सम्भव है।

मुक्ति पर्व विश्व की 2700 से अधिक ब्रांचों में एक साथ मनाया गया, जबकि मुख्य आयोजन दिल्ली में निरंकारी सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के छत्रछाया में सम्पन्न हुआ।

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