गोवर्धन श्राइन बोर्ड के गठन में हील-हुज्‍जत पर NGT सख्‍त नाराज, अपर मुख्य सचिव तलब

मथुरा। गोवर्धन श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर लगातार गुमराह करने पर आज NGT (National Green Tribunal) ने उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी कर रहे अधिवक्‍ताओं को कड़ी फटकार लगाई। यही नहीं, NGT ने प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को अगली तारीख पर न्यायालय के समक्ष मौजूद रहने की हिदायत भी दी है। NGT इस मामले में मथुरा जिला प्रशासन की लापरवाही से भी नाराज हुआ।
दरअसल, आज गोवर्धन श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई की तारीख थी।
सुनवाई के दौरान न्यायधीश रघुवेन्द्र सिंह राठौड़ व सत्यवान सिंह गब्र्याल की पीठ ने सरकार की और से पेश हुए अधिवक्ता को तब कड़ी फटकार लगाई जब उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने श्राइन बोर्ड बनाने संबंधी कानून को पास करने से मना कर दिया है।
सरकारी अधिवक्‍ताओं के इस कथन पर याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास व सत्यप्रकाश मंगल की और से मौजूद अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने न्यायालय को अवगत कराया कि गत 15 तारीख को ही उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव ने इस संदर्भ में अपना शपथपत्र दाखिल करके समय मांगा था जबकि उसी दिन कैबिनेट ने निर्णय भी ले लिया। अधिवक्‍ता सार्थक चतुर्वेदी ने न्‍यायालय का ध्‍यान आकृष्‍ट कराते हुए बताया कि इससे साफ जाहिर है पूर्व में न्यायालय को भृमित करने के लिये गलत शपथपत्र दिया गया।
सार्थक चतुर्वेदी ने न्‍यायालय को बताया कि इससे पूर्व भी 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी अजय पाल सिंह ने श्राइन बोर्ड के गठन के लिए शपथपत्र दाखिल था तथा 2018 में भी सरकार के मुख्य सचिव इस बाबत आदेश जारी कर चुके हैं।
न्यायालय ने इन्‍हीं सब विषयों का संज्ञान लेते हुए अब तक दाखिल हुए शपथपत्रों का हवाला देकर उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है तथा अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को अगली सुनवाई पर हाज़िर रहने की सख्त हिदायत दी है।
NGT ने सरकार की और से मौजूद अधिवक्ता अमित तिवारी से कहा है कि अवनीश अवस्थी श्राइन बोर्ड बनाने संबंधी कानून पर हुई कार्यवाही की लिखित जानकारी के साथ न्यायालय में उपस्थित रहें।
सरकार की और से पेश अधिवक्ता ने नाराज न्यायालय के समक्ष दलील रखते हुए कहा कि अधिकारी अपना कार्य कर रहे हैं, पर श्राइन बोर्ड से संबंधित कानून पर कैबिनेट द्वारा मंजूरी नहीं दिये जाने के कारण वह बाध्य हैं।
मथुरा जिला प्रशासन पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए न्यायालय ने मुड़िया पूर्णिमा मेले के दौरान हुई अव्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार को उत्तरदाई ठहराया।
न्‍यायालय ने कहा कि इस बारे में पूरी जानकारी आने के बाद उचित दंड का आदेश भी पारित किया जाएगा। न्यायालय ने नाराज होते हुए कहा कि ना तो पार्किंग की पर्याप्‍त व्यवस्था थी और ना साफ-सफाई के इंतजाम देखने को मिले। संज्ञान में आया है कि 700 सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर दर्शाकर सिर्फ 70 कर्मचारियों से काम लिया गया। न्यायालय ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 जुलाई तय की है।
-Legend News

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