गंगा प्रदूषण पर NGT सख्‍त, हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा के किनारे का 100 मीटर क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित

नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण NGT ने आज गंगा नदी में प्रदूषण पर सख्त रुख अख्तियार किया। NGT ने हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा के किनारे से 100 मीटर के दायरे को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित करने का निर्देश दिया है।
NGT के चेयरमैन जस्टिस ए के गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए गंगा में हो रहे प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा, गंगा की स्थिति आश्चर्यजनक रूप से बहुत खराब है। इस नदी की सफाई की कोशिशों के बावजूद जमीन पर उसका असर नहीं दिख रहा है।
NGT ने अपने विस्तृत आदेश में गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा के किनारे से 100 मीटर के दायरे को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित करे। साथ ही गंगा किनारे से 500 मीटर के दायरे में कूड़ा डालने पर रोक लगाए। अदालत ने कहा, पिछले दो साल में गंगा सफाई के लिए 7000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन अब भी यह गंभीर पर्यावरण मुद्दा बना हुआ है। इस पीठ में जस्टिस गोयल के अलावा जस्टिस जवाद रहीम और जस्टिस आरएस राठौर शामिल थे।
नियमित निगरानी की जरूरत
NGT ने गंगा सफाई के लिए चल रही योजनाओं में प्रगति पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि स्थिति को सुधारने के लिए इसकी निगरानी किए जाने की जरूरत है। पीठ ने आदेश दिया कि एक सर्वे कराया जाए और पता किया जाए कि आम लोग गंगा में प्रदूषण के बारे में क्या विचार रखते हैं। आम लोग अपना फीडबैक ईमेल के जरिये संबंधित प्राधिकरण को दे सकते हैं।
100 करोड़ की आस्था पर हम रक्षा में नाकाम
हरित न्यायाधिकरण ने कहा, गंगा देश की सबसे प्रतिष्ठित नदी है। 100 करोड़ लोगों की आस्था इससे जुड़ी है, लेकिन हम इसकी रक्षा करने में नाकाम हैं। चलिए हम एक ऐसी मजबूत और प्रभावी प्रणाली बनाने का प्रयास करें।
एजेंसियों को लगाई फटकार
फैसला जारी करने से पहले NGT ने राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी) को कड़ी फटकार लगाई। न्यायाधिकरण एनएमसीजी की ओर से गोमुख से उन्नाव तक गंगा की सफाई पर केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की ओर से उठाए गए कदमों की रिपोर्ट दाखिल नहीं करने से नाराज था।
-एजेंसी

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