क्रिकेट ग्राउंड में पीने का पानी छिड़कने पर NGT नाराज

नई दिल्‍ली। प्रचंड गर्मी के कारण इस वक्त देश के कई हिस्सों में पानी की भारी कमी हो गई है। पीने के पानी का इस्तेमाल क्रिकेट के मैदान पर करने को लेकर NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने नारजगी जाहिर की है। NGT ने पानी बचाने के लिए विशेषज्ञों की टीम को रिपोर्ट सौंपने का काम दिया था। इसके बाद एक एनजीओ फ्रेंड्स ने पीने के पानी का इस्तेमाल क्रिकेट ग्राउंड पर करने को लेकर याचिका दायर की।
याचिका में एनजीओ ने दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) पर आरओ के पानी का इस्तेमाल फिरोजशाह कोटला मैदान पर करने को लेकर आपत्ति जाहिर की। बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टीपीडीडीएल पर भी 7,500 लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद करने का आरोप लगाया। दिल्ली के 31 शैक्षिक संस्थानों में पीने के पानी के लिए आरओ प्लांट्स लगाए गए हैं। अब यह सवाल हर ओर उठ रहा है कि आखिर खेल के मैदानों पर कितने लीटर पेय जल की खपत हो रही है।
क्रिकेट ग्राउंड पर 15 से 20 हजार लीटर पानी की खपत
भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है और अक्सर कई बार इस कारण से क्रिकेट पिचों पर इस्तेमाल होने वाले पानी को लेकर कई संस्थाओं के निशाने पर भी रहा है। क्रिकेट ग्राउंड और पिचों पर इस्तेमाल हो रहे पानी को लेकर पहले भी कई बार आपत्ति जाहिर की गई है। आम तौर पर प्रतिदिन 15 से 20 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल क्रिकेट पिचों की देखभाल पर खर्च होता है। इतने लीटर पानी के इस्तेमाल पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बीसीसीआई और आईपीएल पर सवाल उठाए थे। महाराष्ट्र में रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की किल्लत को देखते हुए कोर्ट ने पिचों पर पानी की बर्बादी को लेकर सख्ती दिखाई थी।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने पानी को लेकर दिखाई थी गंभीरता
पिछले साल मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने लिखित में हाई कोर्ट को आश्वासन दिया था कि पिच पर पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन ने पानी की कमी को गंभीरता से लेने की बात करते हुए कोर्ट से कहा था कि आईपीएल मैचों के दौरान पिचों पर पीने के पानी के स्थान पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए जमा किए पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। एनजीटी की नाराजगी को देखते हुए अभी तो ऐसा लग रहा है कि डीडीसीए को भी मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन जैसे कुछ पहल करने की जरूरत है।
दूसरे खेलों के मैदान पर भी जरूरत होती है पानी की
क्रिकेट ही नहीं कुछ अन्य खेल भी ऐसे हैं जिनकी पिचों पर पानी का छिड़काव अनिवार्य है। हॉकी और फुटबॉल के ग्राउंड पर भी पानी का छिड़काव अनिवार्य है और इसमें काफी मात्रा में पानी खर्च होता है। पारंपरिक तौर पर हॉकी फील्ड के लिए 15,000 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें फील्ड का रन-आफ क्षेत्र शामिल नहीं है। सॉसर और फुटबॉल फील्ड पर पानी की जरूरत सामान्य खेलों से काफी अधिक होती है। इन दोनों खेलों के मैदान पर प्रतिदिन 100,000 पानी के छिड़काव की जरूरत होती है।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »