न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट: भारत-पाक के बीच अब हुआ विवाद तो बड़ा युद्ध संभावित, चीन को बताया खलनायक

नई दिल्‍ली। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार भारत-पाक के बीच यदि अब विवाद हुआ तो आसानी से खत्म नहीं होगा। अखबार ने चीन को खलनायक बताते हुए लिखा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खात्मे को लेकर गंभीर नहीं है।
पुलवामा आतंकी हमला और भारत द्वारा पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा पर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर लगातार गोलाबारी की जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देशों को डर है कि अगर तनाव की इन स्थितियों ने युद्ध का रूप लिया तो ये परमाणु युद्ध का भी रूप ले सकता है। न्यूयार्क टाइम्स ने इसी मुद्दे पर शुक्रवार को संपादकीय प्रकाशित किया है।
अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि परमाणु हमले का खतरा जहां सबसे ज्यादा है, वह उत्तर कोरिया नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान हैं। संपाकीय में कहा गया है कि पुलवामा हमले के बाद फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव शांत होता प्रतीत हो रहा है, और दोनों देशों के पास मौजूद परमाणु हथियार का मतलब है कि अकल्पनीय परिणाम संभव हैं।
भारत और पाकिस्तान इस वक्त ऐसे पड़ोसी देश हैं, जिनके बीच दुनिया में सबसे ज्यादा टकराव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि दोनों देशों ने फिलहाल स्थिति को अच्छी तरह से काबू किया हुआ है। हालांकि इन पड़ोसी देशों को कोई ठोस समाधान तलाशना होगा और ये तब तक संभव नहीं है जब तक भारत और पाकिस्तान अपने मुख्य विवाद का आपसी सहमति से निपटारा नहीं कर लेते हैं। ये विवाद है कश्मीर का। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच कटुता बढ़ती जा रही है और हर वक्त भारत-पाक के बीच भयानक टकराव की आशंका बनी रहती है।
न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि दोनों देशों के बीच ताजा विवाद की वजह 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में अर्धसैनिक बल (CRPF Convoy) के काफिले पर हुआ आत्मघाती हमला है। इस हमले में भारत के 40 जवान शहीद हो गए थे। संपादकीय में पुलवामा टेरर अटैक को भारतीय अर्धसैनिक बलों पर आजादी के बाद हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया गया है। इसके बाद भारत द्वारा पाकिस्तान में वायु सेना के फाइटर प्लेन भेजकर एयर स्ट्राइक करने का भी जिक्र संपादकीय में किया गया है।
जैश को पाकिस्तान का समर्थन
आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। जैश कश्मीर को भारत से आजाद कराना या पाकिस्तान में मिलाना चाहता है। अमेरिका ने इस संगठनों को आतंकवादियों की सूची में शामिल कर रखा है और पाकिस्तान ने भी जैश-ए-मुहम्मद पर प्रतिबंध लगा रखा है। न्यूयार्क टाइम्स ने भी अपने संपादकीय में लिखा है कि इस संगठन को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का संरक्षण प्राप्त है।
इसलिए नहीं निकल पा रहा कश्मीर सस्या का हल
संपादकीय में भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक कर जैश के एक बड़े ट्रेनिंग कैंप को तबाह कर दिया, जिसमें कई आतंकी मारे भी गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान भारत के इस दावे को गलत बता रहा है। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारतीय सीमा में फाइटर जेट भेजा, जिसे मार गिराने के प्रयास में भारत का एक फाइटर प्लेन क्रैश हो गया और उसके पायलट को पाकिस्तान ने गिरफ्तार कर लिया था। इस तरह की स्थितियां दोनों देशों के बीच में कभी भी युद्ध छेड़ने के लिए काफी हैं। लगभग 70 साल में दोनों देशों के बीच तीन युद्ध हो चुके हैं। इसके बाद दोनों देश अपनी सीमा पर सैनिकों को हर वक्त अलर्ट रखते हैं। दोनों देशों के बीच आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए भी बहुत कम औपचारिक बातचीत होती है। इस वजह से कश्मीर समेत अन्य विवादित मुद्दों का हल नहीं निकल पा रहा है।
अगला विवाद शायद इतनी आसानी से खत्म न हो
न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में आशंका व्यक्त की है कि दोनों देशों के बीच होने वाले आगले विवाद को शायद इतनी आसानी से खत्म नहीं किया जा सकेगा। संपादकीय में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने भारत या जम्मू-कश्मीर में हमला करने वाले आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए कभी कोई गंभीर प्रयास नहीं किया है। संपादकीय में पाकिस्तान की नीयत पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। कहा गया है कि पाकिस्तान ने हाल के दिनों में विभिन्न आतंकी संगठनों के 44 सदस्यों को हिरासत में लेने का दावा किया है। इनमें से एक जैश-ए-मुहम्मद सरगना मसूद अजहर का भाई भी बताया जा रहा है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल आतंकी संगठनों की संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही कर रहा है। बावजूद पाकिस्तान के इन दावों पर भरोसा करना मुश्किल है।
आतंकवाद को बढ़ावा देने में चीन भी खलनायक
संपादकीय में कहा गया है कि चीन पाकिस्तान का एक बड़ा सपोर्टर है। इसी वजह से वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हर बार अजहर महमूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लेता है। अगर चीन ने इस बार अजहर महमूद को बचाने का प्रयास नहीं किया तो पाकिस्तान के लिए ये स्पष्ट संकेत होगा कि उसे अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित करना ही होगा। मालूम हो कि इससे पहले 1999, 2000 और 2008 में भी क्रमशः अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, जार्ज बुश और बराक ओबामा ने भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। मौजूदा तनाव को टालने के लिए ट्रंप ने काफी कम प्रयास किए, लेकिन उन्होंने भी कुछ बयान जारी कर दोनों देशों को संयम बरतने का आग्रह किया।
-एजेंसियां

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