राजनीति का नया दौर

Uttar Pradesh elections: Modi will 12 rallies, the first rally in Meerut on February 4
राजनीति का नया दौर

इसे स्वतंत्र भारत की विडम्बना ही कहेंगे कि विगत् 7 दशकों से भारतीय राजनीति की धुरी अब तक सड़क, बिजली एवं पानी के ही इर्द-गिर्द धूम रही है, हालांकि इस दरम्यान देश ने औद्योगिक क्रांति के बाद विज्ञान एवं टेक्नाॅलाजी में आशातीत सफलताओं के साथ कृषि क्षेत्र में भी विकास किया है लेकिन, राजनीति के क्षेत्र में देखा जाए तो इसके स्तर में बद से बदतर स्थिति ही निर्मित हुई है, फिर बात चाहे गरीबी हटाने की हो, जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद, धर्मवाद, सम्प्रदायवाद, आरक्षणवाद होने ने आदमी-आदमी के बीच वोट की खातिर केवल जहर बोने का ही काम किया है। इन 7 दशकों में इन क्षेत्रों में सिर्फ वोट के ठेकेदार ही पैदा हुए हैं।
जाति,धर्म परिवारवाद की सीढ़ी चढ़ तथाकथित नेताओं ने सिर्फ और सिर्फ अपना और अपने खानदान का ही भला किया है, जनता के साथ सिर्फ और सिर्फ एक गुलाम और बंधक की ही तरह व्यवहार किया, तभी तो अब जनता का लोकतंत्र के पर्व चुनाव से विश्वास उठता ही जा रहा है। दागियों की फौज में कम दागी का चुनाव एक तरफ नागनाथ तो दूसरी और सांपनाथ, अपने स्वार्थ सिद्धी के लिए बंदर की तरह कुलाट मार सत्ता पार्टी की गोद में जा बैठने का भी एक रिवाज सा चल पड़ा है।

जनता का विश्वास टूटे तो टूटे……चारों तरफ एक निराशा का वातावरण सा छाया रहा सरकारे एकांगी रूप से चलन में आ गई लेकिन 2014 से राजनीति के क्षेत्र में एक करिश्माई व्यक्तित्व का उदय नमों अर्थात नरेन्द्र मोदी के रूप में देश स्तर पर हुआ। पहले जहां भीड़ जुटाने के लिए भी एक तंत्र सुनियोजित ढंग अर्थात् भाड़े पर लाने का कार्य करता था के मिथक को तोड़ते हुए लाखों जनमानस का स्वेच्छा से लोकतंत्र के यज्ञ में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना एक शुभ संकेत की शुरूआत का लक्षण लगा रहा है

मोदी का केन्द्र में काबिज होने के साथ राजनीतिक पण्डों ने अपने-अपने कयास अर्थात् देश चलाने का अनुभव न होना विदेश नीति की कम समझ जैसे आरोपों की बौछार एवं सत्ता पक्ष की सफलाताओं से खिसयानी बिल्ली की तरह व्यवहार करता रहा है।

मोदी के तीन साल के कार्यकाल में ही विदेशों में मोदी की जमती धाक से परेशान विपक्ष ने एक नया राग अलापा ’’कभी घर भी रहा करो’’ देश के अंदर मोदी का गिरता ग्राफ जैसे कटाक्ष से अपने को आत्म संतुष्ट करने का भ्रामक प्रयास किया। हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनावों की अग्नि परीक्षा में मोदी की कलई उतरने का दावा करने वाली राजनीतिक पार्टियों का लोकतंत्र के महासमर में विपक्ष को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। पांचों राज्यों में निःसंदेह सभी के नजरे उत्तरप्रदेश पर टिकी हुई थी।

राजनीतिक पण्डों की सोच थी कि भाजपा एक विशेष वर्ग की पार्टी है। पांचों प्रदेशों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा होने के कारण अनायास ही एक आकर्षण का केन्द्र हो गया। उत्तर प्रदेश की जनता ने भी विगत दो दशकों में यदि कुछ देखा तो एक परिवार का विकास तो दूसरी और दलित की तारण हारा देवी/मसीहा का उदय। इन दोनों का तो भरपूर विकास हुआ लेकिन दलित को महादलित की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया। दोनों ने ही केवल मतदाताओं की भावनाओं से ही खिलवाड़ किया।

इस विषम परिस्थिति में नरेन्द्र मोदी ने ’’सबका साथ सबका विकास’’ के नारे के साथ चुनावी समर में अपनी नौका को उतारा विपक्ष के आरोपों नोटबंदी, सम्प्रदायवाद, मंदिर-मस्जिद स्मरण जैसी लहरों के बीच सुरक्षित मंजिल पर पहुंच भाजपा के ’’सबका साथ सबका विकास’’ नारे की भावना पर उत्तर प्रदेश की जनता ने विश्वास कर अप्रत्याशित 325 सीटें आर्शीवाद स्वरूप भाजपा की झोली में डाली। इस बार के चुनाव में हत्या, लूट, बालात्कार जैसे आरोपी जनप्रतिनिधियों की बढ़ती संख्या में गिरावट भी देखी गई मसलन 24 प्रतिशत अपराधी घटे। दूसरा 1991 में राम लहर से भी ज्यादा 91 सीटें हासिल कर भावना भड़का कर वोट हासिल करने के दाग से भी भाजपा को मुक्ति मिली।

अब जब उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम में भाजपा का सूरज दमक रहा है भाजपा पर और भी जिम्मेदारी जनमानस के विश्वास पर खरे उतरने की आ पड़ी है मसलन अब सभी को चाहे हिन्दू, मुसलमान, इसाई एवं अन्य को विकास के साथ रोजगार चाहिए, भ्रष्टाचार, गुण्डागर्दी पर लगाम चाहिए। निःसन्देह जीत के बाद मोदी ने अपने पहले भाषण में आगे की नीति-रीति स्पष्ट की है फिर बात चाहे बिना भेदभाव के राज्यों के विकास की बात हो, आगे जनहित में और भी कड़े निर्णय लेने की हो, गांव के विकास की हो।

यहां यक्ष प्रश्न उठता है भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति में नेता अधिकारी के गठजोड़ को मोदी कैसे तोड़ेंगे? दूसरी और सत्ता के मद में मदमस्त अपने ही सांसदों/विधायकों/अन्य प्रतिनिधियों की बढ़ती दबंगाई से कैसे निपटेंगे?

यदि इन पर प्रहार हो तो कर्मयोग की जीत का घोड़ा निर्वाद्ध एवं निर्विवाद रूप से अवाध गति से दौड़ता रहेगा, और राजनीति के इस नए दौर में मोदी के नए भारत के निर्माण के संकल्प में अब आम आदमी भी संकल्पित है।

डा. शशि तिवारी
शशि फीचर.ओ.आर.जी.
लेखिका सूचना मंत्र की संपादक हैं
मो. 9425677352

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