Data चोरी रोकने को यूरोप में 25 मई से नया कानून, दुनियाभर में पड़ेगा असर

Facebook पर Data चोरी का आरोप लगाने वाले यूरोप में 25 मई से नया डेटा कानून अमल में आ जाएगा। यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर Data को सुरक्षित बनाने की पहल हो रही है। इस कानून से यह तय होगा कि कंपनियां यूजर का Data मनमाफिक तरीके से इस्तेमाल न कर सकें। बदलाव की यह शुरुआत यूरोपीय यूनियन के देशों से हो रही है मगर इसका असर दुनिया के बाकी हिस्सों में पड़ना तय है।
कैसे नया कानून लोगों की जिंदगी और आजादी पर असर डालेगा-
क्या है नया कानून?
जनरल Data प्रोटेक्शन रेग्युलेशन (GDPR) यूरोपियन यूनियन (ईयू) का नया डेटा प्राइवेसी लॉ है। यह 1995 में बने पुराने कानून की जगह लेगा। नए कानून के अमल में आते ही कंपनियों को आपके डेटा को जमा करने, प्रॉसेस करने या स्टोर करने में इस बात का ख्याल रखना होगा कि वह पूरी तरह सुरक्षित रहे। साथ ही लोगों को भी अपने पर्सनल Data पर पहले से कहीं अधिक कंट्रोल मिल जाएगा। कुल मिलाकर यूजर की प्राइवेसी का ख्याल रखना अब कंपनियों का पहला फर्ज होगा। बढ़ते साइबर हमलों और डेटा लीक की घटनाओं को देखते हुए नया कानून जरूरी बन गया था।
यूजर को क्या करना होगा अब?
सीएनएन के मुताबिक नए कानून के अमल में आते ही कंपनियां आपसे आपके Data के इस्तेमाल के बारे में रजामंदी लेंगी। इसके लिए आपके पास ईमेल आएंगे। गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी कंपनियों ने तो अपनी प्राइवेसी सेटिंग बदलकर उन्हें नए नियमों के मुताबिक बना दिया है।
क्या कंपनियां अभी भी Data जमा कर पाएंगी?
कंपनियां ऐसा कर सकेंगी बशर्ते उनके पास इसकी वाजिब वजह हो। पर्सनल डेटा स्टोर करने से पहले उन्हें सीधी-सरल भाषा में यूजर का अप्रूवल लेना होगा, कोई छिपी शर्तें या नियम नहीं लगा सकेंगे। हालांकि, जनहित के काम में डेटा की प्रॉसेसिंग बिना इजाजत के भी की जा सकेगी।
कंपनियों को क्या करना होगा?
जब तक जरूरी हो, तभी तक कंपनियां अपने पास लोगों का डेटा रख पाएंगी। कोई भी व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत जानकारी कंपनी के सर्वर से डिलीट करने की मांग कर सकता है। अगर Data चोरी का कोई भी मामला सामने आता है तो कंपनी को 72 घंटों के भीतर उसके बारे में अथॉरिटीज को बताना होगा।
किस पर होगा असर?
यूरोपियन यूनियन में रहने वाले किसी भी व्यक्ति का Data अगर कोई संगठन अपने पास रखता है या उसका इस्तेमाल करता है तो उस पर नए नियम लागू होंगे। फिर चाहें वह संस्थान दुनिया में कहीं भी स्थित हो।
क्या होगा अगर कंपनियां कानून तोड़ेंगी?
कानून तोड़ने वाली कपनियों पर उसके सालाना ग्लोबल सेल्स का 4 प्रतिशत तक हर्जाना लग सकता है। बड़ी टेक कंपनियों के मामले में यह अरबों डॉलर का भी हो सकता है। छोटी कंपनियों के लिए पेनल्टी की सीमा 23.5 मिलियन डॉलर तय की गई है।
-एजेंसी

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