दोस्ती का नया अध्‍याय: चीन ने रूस को तोहफे में दिए 2 विशेष पांडा

मॉस्को। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग मॉस्को के दौरे पर हैं। चीन और रूस की दोस्ती और संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर दोनों देश इस दोस्ती को बता रहें। 2014 में क्राइमिया संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों के असहयोग के बाद से रूस और चीन के बीच काफी व्यापार बढ़ा है और इससे चीन को काफी फायदा हुआ। हालांकि, इस दौरे पर सबका ध्यान खास तौर पर 2 विशेष पांडा (चीन में पाई जाने वाली भालू की प्रजाति) पर भी है जिसे चीनी प्रतिनिधि मंडल तोहफे में देने के लिए लाया है। ये दोनों पांडा मॉस्को के चिड़ियाघर में रखे जाएंगे।
कूटनीतिक संबंधों के लिए पांडा संकेत की तरह
चीन की विदेश नीति में पांडा हमेशा एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं। 1950 के दशक से ही चीन के अन्य राष्ट्रों के साथ कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से पांडा को देखा जाता रहा है। 1957 में पहली बार यूएसएसआर को पिंगपिंग नाम का पांडा तोहफे में दिया गया था। मित्र राष्ट्रों को पांडा गिफ्ट करने के इस कूटनीतिक संकेत को अक्सर पांडा कूटनीति भी कहा जाता है। 1965 में चीन ने नॉर्थ कोरिया को पांडा गिफ्ट किया था। इसके बाद कई देशों को तोहफे में पांडा दिया गया। 1972 में अमेरिका, जापान (1972, 1980, 1982), फ्रांस (1973), यूके और जर्मनी (1974) और मेक्सिको (1975) में गिफ्ट किया गया।
नाखुशी जाहिर करने के लिए भी दिया जाता है पांडा
पांडा हमेशा मित्रता या अच्छे संबंधों के संकेत के तौर पर ही नहीं दिया जाता है। आकार में विशालकाय पांडा देने को चीन अपनी नाखुशी जाहिर करने के लिए भी जाहिर करता है। 2010 में अमेरिका को चीन ने विशालकाय आकार का पांडा दिया था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की दलाई लामा से मुलाकात चीन को सख्त नागावार गुजरी थी और इसलिए चीन ने सांकेतिक हावभाव के तौर पर ऐसा किया था।
पांडा लोन के संकेत के तौर पर भी चीन ने दिया
शुरुआत में चीन की ओर से पांडा सिर्फ तोहफे में मित्र राष्ट्रों को ही दिया जाता रहा है। 1982 से चीन ने पांडा को लोन के सांकेतिक प्रतीक के तौर पर दिया। कुछ चुने हुए राष्ट्रों को पांडा की देखभाल के बदले चीन लोन देता है और इसके लिए कीमत भी तय है। जैसे प्रतिवर्ष एक पांडा की देखभाल के लिए चीन 1 मिलियन की रकम देता है। यह रकम असल में पांडा सर्वेक्षण योजना के लिए होती है। अगर किसी चिड़ियाघर में मादा पांडा से बच्चे का जन्म होता है तो वह भी चीन की ही संपत्ति होती है और नवजात पांडा की देखभाल के लिए अलग से 4 लाख डॉलर दिए जाते हैं।
पांडा और व्यापार भी एक-दूसरे से जुड़े हैं
चीन की ओर से किसी भी देश को पांडा नहीं दिए जाते। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की 2013 की स्टडी के अनुसार चीन ने सिंगापुर और मलयेशिया को पांडा दिए जिन्हें वह महत्वपूर्ण एशियाई पार्टनर के तौर पर देखता है। जिन राष्ट्रों के साथ चीन के व्यापारिक संबंध बेहतर होते जाते हैं चीन उन्हें ही पांडा तोहफे में देता है। जैसे आसियान-चाइना मुफ्त व्यापार समझौता होने के बाद ही चीन ने सिंगापुर और मलयेशिया को तोहफे में पांडा दिए। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस को चीन ने न्यूक्लियर पावर क्षमता में बढ़ोत्तरी की स्वीकृति के बाद तोहफे में पांडा दिए।
रूस के साथ चीन के कौन से व्यापारिक समझौते होते हैं, इसकी जानकारी इस सप्ताह के अंत तक पता चल जाएगी। रूस में पांडा लेकर गए चीन के अब तक के रेकॉर्ड को देखें तो ऐसा ही लगता है कि कोई बड़ा समझौता होने वाला है।
-एजेंसियां

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