नए जमाने की महिलाएं ‘हाउसवाइफ’ वर्ड को रीडिफाइन कर रही हैं

नए जमाने की महिलाएं हाउसवाइफ वर्ड को रीडिफाइन कर रही हैं। 21वीं सदी की ज्यादातर महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद घर पर ही रहना और हाउसवाइफ बने रहना पसंद कर रही हैं। वे अपनी खुशी से अपनी 7 फिगर सैलरी को छोड़कर घर पर रहना, बच्चे और परिवार पर ध्यान देना चाहती हैं। इनमें से बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो अगर काम करती भी हैं तो वर्क फ्रॉम होम या फ्रीलांस जॉब करती हैं या फिर अपनी एक हॉबी को टाइम देती हैं फिर चाहे वह किताबें पढ़ना हो, गाने सुनना या खाना बनाना। लेकिन आखिर उनके ऐसा करने की वजह क्या है-
बदल जाती है प्रायॉरिटी
कभी अपने करियर को लेकर हर वक्त फोकस्ड रहने वाली उस लड़की की प्रायॉरिटी बदल जाती है जैसे ही वह मां बनती है। हो सकता है प्रेग्नेंसी के दौरान भी उसने आराम न किया हो और हर वक्त ऑफिस जाती हो लेकिन जैसे ही उसके बच्चे का जन्म होता है वह चाहती है कि हर वक्त बच्चे के साथ घर पर ही रहे। वह मदरहुड की चुनौतियों को अनुभव करना चाहती है, साथ ही मातृत्व से जुड़ी खुशियों से भी वंचित रहना नहीं चाहती।
काम और घर को बैलेंस करने में मुश्किल
एक मां से उम्मीद की जाती है कि वह हर वक्त अपने बच्चों के लिए 100 प्रतिशत रूप से मौजूद रहे। साथ ही काम के दौरान वर्क फ्रंट पर भी उससे यही उम्मीद की जाती है कि वह अपने करियर में आगे बढ़ती रहे और बेहतर से बेहतर काम करे। करियर और बच्चों के बीच 2 अलग-अलग विचारों का टकराव एक मां को तोड़कर रख देता है। वह मां भले ही बाहरवालों की बातों को अनसुना कर दे लेकिन अपने अंदर की आवाज और फीलिंग्स को कैसे नजरअंदाज करेगी जो उसे हमेशा इस बात के लिए कोसते रहते हैं कि उसे अपने बच्चे को टाइम देना चाहिए। कुछ महीने या कुछ साल के बाद आखिरकार वह इस बात को स्वीकार कर ही लेती है कि उसे अपने बच्चों के साथ घर पर ही रहना है।
कौन रखेगा बच्चे का ख्याल?
बच्चे के जन्म के बाद भी काम जारी रखने वाली ज्यादातर महिलाओं को जिस समस्या का सामना करना पड़ता है वह है डेकेयर की असंतोषजनक सेवाएं। साथ ही ऐसी कामवाली मिलना भी एक तरह से असंभव ही है जो ईमानदार और भरोसेमंद होने के साथ ही परिवार के सदस्य की तरह बच्चे का ख्याल रखे। हो सकता है मटरनिटी लीव के बाद नई मां बच्चे को नैनी या डेकेयर में छोड़ने का फैसला कर ले। लेकिन जब उसे एक के बाद एक गलत अनुभवों का सामना करना पड़ता है तो आखिरकार थक कर वह घर पर ही रहने का फैसला लेती है।
ऑप्शन्स की कमी नहीं
सबसे बड़ी बात यह है कि 21वीं सदी की नई मांओं के लिए किसी भी तरह के मौकों की कमी नहीं है। वह चाहे तो फुल टाइम ऑफिस वर्क छोड़कर पार्ट-टाइम वर्क, कॉन्ट्रैक्ट जॉब, फ्रीलांसिंग, वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन ट्यूटोरिंग, कॉन्टेंट राइटिंग, ट्रांसलेशन और सोशल मीडिया हैंडलिंग जैसे कामों के जरिए घर पर रहकर भी पैसे कमा सकती है। शायद यही वजह है कि नई माएं बिना किसी आर्थिक चिंता के हाउसवाइफ बनना पसंद कर रही हैं।
-एजेंसिया

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