इस शहर में कभी 12 नहीं बजते, 11 नंबर से है खास लगाव

स्विटजरलैंड का एक बहुत ही सुंदर शहर है सोलोथर्न। इस शहर को नंबर 11 से खास लगाव है। यहां हर चीज का डिजाइन इस जादुई नंबर के इर्द-गिर्द घूमता है।
11 का जादू
यहां चर्चों और चैपलों की संख्या भी 11-11 है। 11 ऐतिहासिक झरने, 11 संग्रहालय और 11 टावर हैं।
मुख्य गिरजाघर में भी 11 का जलवा
यहां सेंट उर्सूस के मुख्य गिरजाघर में भी आपको 11 से लोगों का खास स्नेह दिख जाएगा। यह 11 साल में बनकर तैयार हुआ था। यहां सीढ़ियों का तीन सेट हैं। हर में 11 पंक्तियां, 11 दरवाजे, 11 घंटियां और 11 वेदियां हैं। उनमें से एक में 11 तरह के संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है। वेदियों को गिरजाघर के एक ही स्थान से देखा जा सकता है। वह स्थान है, इसके बीचोबीच में 11वां काला पत्थर।
लोगों के जीवन में शामिल
नंबर 11 का लोगों के जीवन में भी खास महत्व है। हर 11वें जन्मदिन पर खास समारोह का आयोजन होता है। प्रॉडक्ट के नाम से भी 11 जुड़ा है। जैसे ऑफी बीयर यानी बीयर 11, 11-आई चॉकोलेड (11-चॉकलेट)।
घड़ी जिसमें कभी नहीं बजता 12
ऐसी घड़ी के बारे में सुनकर आप चौंक गए होंगे। लेकिन यह सच है। दरअसल यहां के टाउन स्क्वेयर पर एक घड़ी लगी है। उस घड़ी में घंटे की सिर्फ 11 सुइयां हैं। 12 उसमें से गायब है।
कारण
सोलोथर्न के लोगों को 11 नंबर से इतना लगाव क्यों है, इसको लेकर कई थिअरी है। एक थिअरी के मुताबिक, सोलोर्थन के लोग काफी मेहनत करते थे लेकिन उनकी जिंदगियों से खुशियां गायब थीं। कुछ समय बाद पास के पहाड़ से परियां आने लगीं। वो परियां लोगों का हौसला बढ़ातीं और उनकी तारीफ करतीं। इससे उनलोगों के बीच खुशहाली आई। परियों को वैसे इंग्लिश में एल्फ कहा जाता है और जर्मनी भाषा में एल्फ का मतलब 11 होता है। लोगों ने इस तरह से उन परियों को 11 नंबर से जोड़ दिया और उनके अहसानों को याद करने के लिए नंबर 11 को महत्व देना शुरू कर दिया। दूसरी थिअरी कहती है कि इसका संबंध बाइबिल से है। बाइबिल में 11 को खास नंबर बताया गया। इसलिए ही लोगों के बीच 11 नंबर को लेकर खास लगाव है।
इतिहास
सोलोथर्न के इतिहास में 11 नंबर का उल्लेख पहली बार सन् 1252 में मिलता है। कहा जाता है कि उसी साल वहां शहर की काउंसिल के लिए 11 सदस्यों को निर्वाचित किया गया था। फिर 1481 में सोलोथर्न स्विस संघ का 11वां कैंटोन बन गया। करीब एक सदी बाद इसे 11 प्रॉटेक्टोरेट्स में बांटा गया। इस स्थान के इतिहास में मध्यकाल में 11 समुदायों का उल्लेख मिलता है।
-एजेंसियां

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