तीर्थराज Prayag में पहुंचा नेपाल का मुरली काफिला

इलाहाबाद। मनोवांछित फल प्राप्ति के विश्वास को लेकर तीर्थराज Prayag पहुंचा नेपाल के 600 लोगों का मुरली काफिला माघ मेले में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के तट पर भजन कीर्तन में तल्लीन है। मुरली काफिला के पुरोहित आचार्य शिव नारायण उपाध्याय ने आज पंटून पुल नम्बर दो के नीचे लगे काफिले के शिविर में कहा कि नेपाल के वीरगंज समेत 35 कस्बों से काफिला यहां मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए आया है। उनका यह काफिला कई शिविरों में रूका हुआ है। उनका दावा है कि अभी तक जितने भी लोग यहां आये हैं, पांच सालों के भीतर उनकी मनोकामनायें पूरी होती रही हैं। किसी ने प्रयाग में आकर नौकरी की तमन्ना की थी तो किसी ने पुत्र की तो किसी ने अन्य, सभी की मनोकामनायें पूरी हुई। यह काफिला पिछले करीब दस सालों से आ रहा है।

उन्होंने बताया कि उनका काफिला शनिवार को यहां पहुंचा है और अमावस्या स्नान के बाद गंगा जल लेकर अयोध्या गोरखपुर होते हुए अरेराज में बाबा सुमेश्वरनाथ को जल चढाकर वापस अपने घर लौट जायेगा। उन्होंने बताया कि भारत में शिवलिंग की पूजा की जाती है परन्तु नेपाल में ब्रमाण्ड नाथ अर्थात विश्वनाथ के सिर की पूजा की जाती है जिसे पशुपतिनाथ कहा जाता है।

श्री उपाध्याय ने बताया वे लोग शिव सम्प्रदाय से हैं। जैसे लोग श्रावण मास में कांवर लेकर यहां आते हैं उसी प्रकार वे लोग माघ मास में यहां आते हैं। यहां आने वाले पहले से ही ब्रमचर्य का पालन करते हैं। इस दौरान वे लहसुन, प्याज, तेल, मसूर दाल, भंटा, टमाटर, सेम आदि से परहेज करते हैं। तेल के स्थान पर देसी घी का उपयोग करते हैं। उन्होंने मत्सपुराण के अनुसार तीर्थराज प्रयाग का दर्शन, इसकी महिमा का गायन और भजन तथा स्पर्श (जल) मात्र ही मुक्ति दायक बताया। गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस में पहले ही कह चुके हैं ‘को कहि सकई प्रयाग प्रभाऊ, कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।’ पुराणों में प्रयाग के महात्म का बहुत बखान है। प्रयाग धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से अति-महत्वपूर्ण है। यह आत्मज्ञान और ज्ञान प्राप्ति का उत्तम स्थान है। यह मानव प्रेम की शिक्षा देता है। यह आत्मज्ञान और ज्ञान प्राप्ति का उत्तम स्थान है। यह मानव प्रेम की शिक्षा देता है।

पुरोहित आचार्य ने बताया कि ‘प्र’ का अर्थ होता है बहुत बड़ा तथा ‘याग’ का अर्थ होता है यज्ञ। ‘प्रकृष्टो यज्ञो अभूद्यत्र तदेव प्रयाग। ‘इस प्रकार इसका नाम ‘प्रयाग’ पड़ा। दूसरा वह स्थान जहां बहुत से यज्ञ हुए हों।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेपाल यात्रा ने इस संबंध को नयी दिशा देने की कोशिश की है। भारत ने नेपाल को हर तरह की सहायता प्रदान कर वहां स्थायित्व लाने का प्रयास किया। वहां आये विनाशकारी भूकंप में भारत से मिली सहायता को नेपाल कभी भूल नहीं सकता। पड़ोसी होने के कारण जिस तरह ये दोनों राष्ट्र राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से जुड़े हैं उसी प्रकार एक सांस्कृतिक सूत्र में बंधे होने के कारण भावनात्मक रूप से भी एक दूसरे से जुड़े हैं।

श्री उपाध्याय ने कहा कि भारत-नेपाल केवल पड़ोसी मुल्क ही नहीं है बल्कि इनका सदियों पुराना नाता है जो इन्हें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से जोड़ता है। सदियों से इस रिश्तों की परंपरा को दोनों देशों ने निभाया है। हालांकि दोनों देशों के रिश्तों में उतार चढ़ाव आता रहा है बावजूद इसके परपंरा का सम्मान दोनो देशों के संबंधों में हमेशा मिठास घोलता आया है। Prayag आने को लेकर उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक ही नहीं रोटी-बेटी का रिश्ता है।
-एजेंसी