उत्तर कोरिया से ख़तरा महसूस कर रहे हैं पड़ोसी मुल्‍क

उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम में उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी के कारण पड़ोसी मुल्कों को सुरक्षा ख़तरे में लग रही है. इसमें कोरियाई प्रायद्वीप में हित रखने वाला अमरीका भी है.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के प्रतिनिधि ने कहा, “बीते 24 महीनों में हमारे सभी प्रयासों के बावजूद उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार कार्यक्रम पहले के मुक़ाबले अब ज़्यादा ख़तरनाक और आधुनिक है.”
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के नेता किम जोंग उन युद्ध के बजाय खुद को परमाणु हमलों से बचाने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन बाकी देश इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहते.
राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़े एक देश, जिसकी महत्वाकांक्षा परमाणु हथियारों में है, उससे आप कैसे बचाव कर पाएंगे?
दक्षिण कोरिया
उत्तर कोरिया के लिए दक्षिण कोरिया सबसे नज़दीक और आसान निशाना है.
अपने उत्तरी पड़ोसी की हरकतों से बचने और उसे जवाब देने की तैयारियां करने का कोरिया के इस आधे इलाके का लंबा इतिहास रहा है.
दोनों देश तकनीकी रूप से अभी भी युद्ध की स्थिति में हैं और 1953 में कोरियाई युद्ध समाप्त होने के बाद भी दोनों ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
दोनों देशों के बीच बचाव का सबसे अहम हिस्सा असैन्य क्षेत्र वाली 250 किलोमीटर लंबी सीमा है. दोनों देशों की यह सीमा 4 किलोमीटर चौड़ी है, जो दोनों को अलग करती है.
दोनों तरफ हजारों सैनिक तैनात हैं, कंटीले तार लगे हैं और बारूदी सुरंगें बनी हुई हैं.
किलेबंदी किसी काम की नहीं
ऐसा माना जा रहा है कि 10 लाख से ज़्यादा नियमित सैनिकों और लाखों रिजर्व सैनिकों वाली उत्तर कोरिया की पीपल्स आर्मी ने इस बात का बखूबी अभ्यास कर लिया है कि सीमा पार कैसे अभियान चलाया जा सकता है.
इस तरह लंबी ज़मीनी सीमा पर की गई किलेबंदी किसी काम की नहीं है, खासकर मिसाइल हमलों को रोकने के लिए तो बिल्कुल नहीं.
ऐसा माना जाता था कि थाड (Terminal High Altitude Area Defense) किसी भी परमाणु हमले के वक़्त दक्षिण कोरिया का सबसे अच्छा जवाब हो सकता है.
थाड को दक्षिण कोरिया के सहयोगी अमरीका से पैसा मिलता है. इसे ऐसे डिजाइन किया गया कि बैलेस्टिक मिसाइल से हुए हमले के अंतिम समय पर भी नष्ट कर सके.
यह तकनीकी 2017 में सामने आई और इसका परीक्षण भी सफल रहा.
परमाणु परीक्षण की ख़बर
हालांकि उत्तर से संबंधों को लेकर दक्षिण कोरिया की राजनीति ऐसी है कि उनके बीच सब कुछ सही होना आसान नहीं है.
उत्तर कोरिया और उसके सहयोगी चीन, दोनों थाड को एक उकसावे के तौर पर देखते हैं और जहां-जहां इसे रखा गया है वहां रहने वाले दक्षिण कोरियाई लोग भी किसी सैन्य कार्यवाही का निशाना बनने से डर रहे हैं.
दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति मून जे-इन ने अपनी तरफ से कोई भी कार्यवाही किए जाने से पहले पर्यावरण पर होने वाले असर का विश्लेषण करने का आदेश दिया.
हालांकि हालिया परमाणु परीक्षणों की ख़बरों के बाद दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने कहा कि वे बचे हुए चार थाड लॉन्चर भी तैनात करेंगे, जो उन्हें मिल चुके हैं.
इनमें से दो पहले ही काम कर रहे हैं.
जापान
जापान और उत्तर कोरिया के बीच महज़ 500 किमी का फ़ासला है. यानी जापान भी हमले के लिए आसान ज़द में है.
अगस्त में प्योंगयांग ने जापान के ऊपर से मिसाइल गुजारी थी जिस पर राष्ट्रपति शिंजो आबे ने इसे देश पर बड़ा ख़तरा बताया था.
दोनों देशों के बीच दूरी कम होने की वजह से किसी भी हमले की स्थिति में जापान के पास ख़तरे से निपटने के लिए कुछ ही मिनटों का वक़्त होगा.
अगस्त में किए गए मिसाइल परीक्षण के वक़्त जापान के लोग क़रीब तीन मिनट तक आपातकालीन अलार्म सुनते रहे, जब तक कि मिसाइल गुज़र नहीं गई.
बहुत से लोगों के इसके बारे में बाद में पता चला.
समुद्र में सुरक्षा
रक्षा विकल्पों की बात करें तो जापान थाड की तरह की एक मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करता है और किसी भी आने वाली मिसाइल को ख़त्म कर सकता है लेकिन इसकी सीमा कम है.
इसका इस्तेमाल कुछ खास जगहों पर सुरक्षा के लिए किया जा सकता है लेकिन पूरे देश में नहीं.
हालांकि जापान को ज़मीनी स्तर पर या समुद्र में लड़ाई होने की स्थिति में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
जापान, दक्षिण कोरिया और अमरीका उन देशों में हैं, जहां रक्षा के लिए नौसेना में ईजस सिस्टम मौजूद है.
ईजस भी एक एंटी-मिसाइस सिस्टम है लेकिन थाड और दूसरे हथियारों से इतर इसे समुद्र में पहरा देने वाले जहाजों में भी भेजा जा सकता है.
ईजस सिस्टम
वो युद्धपोत तकनीकी रूप से काफ़ी बेहतर और मज़बूत रडार वाले होते हैं जो उत्तर कोरियाई तट के पास होने वाले किसी भी प्रक्षेपण का पता लगा सकते हैं.
उन्हें कुछ मिसाइल के साथ फिट भी किया जाता है और ये आने वाली मिसाइल को धाराशाई करने का प्रयास भी करते हैं.
या फिर इससे जुड़े ट्रैकिंग डाटा की जानकारी देते हैं जो दूसरे मिसाइल डिफेंस सिस्टम निशाने के पास होते हैं.
इस सिस्टम के साथ भी समस्याएं हैं. ईजस जहाजों को सही वक़्त पर सही जगह भेजे जाने की ज़रूरत होती है.
इसके अलावा परीक्षण के बाद इनका असल इस्तेमाल कभी नहीं किया गया.
अमरीका
सालों से अमरीका की बेहतर सुरक्षा के लिए उत्तर कोरिया से इसकी दूरी भी अहम रही है. अलास्का से यह 5000 किमी दूर है तो सैन फ्रैंसिस्को से करीब 9000 किमी लेकिन लगातार तकनीकी प्रयोगों ने दूरी की समस्या को ख़त्म किया है.
उत्तर कोरिया की सेना ऐसा बम चाहती है जो किसी भी इंटर कॉन्टिनेंटल मिसाइल पर फ़िट हो जाए. अगर ऐसा होता है तो अमरीका पर हमला आसान होगा.
हालिया परीक्षण के बाद उत्तर कोरिया का दावा है कि उसने छोटे आकार का बम बना लिया है जिसका असर भयावह होगा.
इसके लिए बाकायदा तस्वीर जारी की गई और बताया गया कि यह एक हाइड्रोजन बम है.
इस कदम के बाद अमरीका ने अपने मिसाइल रक्षा सिस्टम पर फिर से काम करना शुरू किया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरे सिस्टम के रीव्यू का आदेश दिया है.
आधुनिक मिसाइलों के मुक़ाबले
अमरीका के पास पहले से मिसाइल को पहचानने और उसे नष्ट करने का सिस्टम मौजूद है लेकिन आलोचकों का मानना है कि अमरीकी सिस्टम भरोसे के लायक नहीं रहा. बीबीसी के डिप्लोमेटिक रिपोर्टर जॉनाथन मर्कस ने जुलाई में ऐसा लिखा था.
उन्होंने कहा आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया की आधुनिक मिसाइलों के मुक़ाबले अमरीकी की कुछ ही इंटरसेप्टर मिसाइल काम के लायक रह जाएंगी,
इसके अलावा अमरीका के लिए गुआम क्षेत्र की सुरक्षा भी एक संकट है. यह एक सैन्य पोस्ट है जिसे लेकर उत्तर कोरिया ने ख़तरे के संकेत दिए हैं.
इस द्वीप पर पहले से ही थाड सिस्टम को तैनात कर दिया गया है लेकिन सरकारी मीडिया का कहना है कि किम जोंग उन पहले ही हमले के प्लान के बारे में बात कर चुके हैं और उन्हें अब अमरीका के अगले क़दम का इंतजार है.
-BBC