मुल्‍ला नसरुद्दीन को पड़ोसी ने दी बहस की चुनौती

मुल्‍ला नसरुद्दीन की शोहरत इतनी ज्‍यादा हो गई थी कि उससे काफी लोग जलने भी लगे थे। रोज-रोज मुल्‍ला की तारीफों के पुल बंधते देख एक दिन उसके एक पड़ोसी ने सोचा कि क्‍यों न मुल्‍ला को चुनौती देकर देखी जाए। आखिर ऐसा क्‍या है मुल्‍ला के तर्क-वितर्कों में जो मेरे पास नहीं है।
मुल्‍ला को जब यह बात पता लगी कि उसका पड़ोसी उसे चुनौती देना चाहता है किंतु कह नहीं पा रहा, तो मुल्‍ला ने खुद उसे निमंत्रण दे दिया और कहा कि आप फलां दिन, फलां समय मेरे गरीब खाने पर तशरीफ़ ले आएं।
निर्धारित दिन ओर समय पर जब मुल्‍ला का पड़ोसी उसके घर पहुंचा तो देखता क्‍या है कि मुल्‍ला के घर पर तो ताला लटका हुआ है।
यह देखकर पड़ोसी का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा और गुस्‍से में उसने मुल्‍ला के दरवाजे पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिख दिया ”बेवकूफ”।
जब मुल्‍ला वापस लौटा तथा उसने अपने दरवाजे पर ”बेवकूफ” लिखा देखा तो वह उल्‍टे पांव वापस लौट गया और जा पहुंचा पड़ोसी के घर। वहां उसने जैसे ही दस्‍तक दी तो पड़ोसी निकल आया। पड़ोसी को देखते ही मुल्‍ला ने कहा- जनाब, आप मेरे घर आए थे बहस के लिए किंतु अफसोस कि मैं आपको नहीं मिला।
दरअसल, मैं आपसे बहस की बात भूल गया था लेकिन लौटकर जब मैंने अपने घर के दरवाजे पर आपके दस्‍तखत देखे तो मुझे तुरंत याद आ गया कि मैंने आपको समय दिया था। बस, और मैं चला आया।