इलाज में लापरवाही, दिल्‍ली के निजी अस्‍पताल को चुकाने होंगे 20 लाख रुपए

नई दिल्‍ली। इलाज और देखभाल के लिए बने हॉस्पिटल में यदि वहां के डॉक्टर्स ही लापरवाही बरतते हुए किसी की मौत का कारण बन जाएं तो उन्हें बक्शा नहीं जाना चाहिए। शायद इसीलिए उपभोक्‍ता फोरम ने एक नजीर पेश की है।
राजधानी दिल्ली के एक हॉस्‍पिटल को 10 साल पुराने मामले में आर्थिक दंड भुगतने की सजा दी गई है। इस मामले में हॉस्पिटल की लापरवाही के कारण एक शख्स ने अपनी गर्भवती पत्नी और होने वाले बच्चे को खो दिया था। अब उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हॉस्पिटल को आदेश दिया है कि वह पीड़ित शख्स को मुआवजे के तौर पर 20 लाख रुपये दे।
यह मामला वसंत विहार का है। वहां होली ऐंजल्स नाम का एक हॉस्पिटल है। उन दिनों योगेश वटवानी की पत्नी डॉली अपने चेकअप के लिए रोजाना उस हॉस्पिटल में जाती थीं, फिर वहीं भर्ती भी हो गईं। यहां डॉक्टर जयश्री उनका इलाज कर रही थीं। एक दिन शाम 4 बजे इलाज के दौरान पता चला की डॉली को ब्लीडिंग हो रही है। बावजूद इसके डॉक्टर ने कहा कि डिलिवरी में अभी टाइम है और 4.50 पर हॉस्पिटल छोड़कर चली गईं।
पति ने आयोग में अपनी शिकायत में बताया कि उस दौरान डॉली को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, वह मदद के लिए भी चिल्लाईं लेकिन नर्स काफी देर में वहां पहुंची। फिर डॉक्टर भी 20 मिनट बाद हॉस्पिटल पहुंचीं। फिर सुन्न करने के लिए दी जाने वाली दवाई वहां न होने के चलते हालात और बिगड़ गए। पैनल ने हॉस्पिटल को दोषी ठहराते हुए यह मुद्दा उठाया है कि डॉक्टर ने हॉस्पिटल छोड़ते वक्त स्टाफ में से किसी को नहीं बताया था कि आपातकाल की स्थिति में क्या करना है।
-एजेंसियां

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