टोक्‍यो में इतिहास रचकर नीरज ने कहा, यह सब भगवान की प्लानिंग का नतीजा

नीरज चोपड़ा ने टोक्‍यो ओलिंपिक में गोल्ड जीतने के बाद कहा यह सब इत्तेफाक है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी देश के लिए खेलने के बारे में नहीं सोचा था।
नीरज चोपड़ा के हाथ से भाला छूटा और जमीन से टकराते ही उसने इतिहास रच दिया। वह भाला 87.58 मीटर दूर गिरा था और यह उन्हें ओलिंपिक में गोल्ड मेडल दिलवाने के लिए काफी था। नीरज ट्रैक एंड फील्ड में मेडल जीतने वाले पहले आजाद भारत के पहले ऐथलीट बने। नीरज का जैवलिन का सफर वजन कम करने से शुरू हुआ और अब यह ओलिंपिक पोडियम तक पहुंच गया है।
नीरज हालांकि मानते हैं कि यह सब ईश्वर की कृपा और इत्तेफाक है। उन्होंने कहा, ‘देखिए, मैंने कभी सोचा नहीं था कि खेलना है। मैंने कभी देश के बारे में खेलने के बारे में भी विचार नहीं किया था।’
नीरज का बचपन में वजन काफी ज्यादा था और पहली बार स्टेडियम वह वजन कम करने के लिए मकसद से ही गए थे। वहां उन्होंने कुछ सीनियर्स को जैवलिन फेंकते देखा और खेल के प्रति उनका रुझान पैदा हुआ।
नीरज ने कहा कि ‘मैं भगवान का शुक्रिया करता हूं, मुझे लगता है कि यह भगवान की पहले से प्लानिंग थी। चूंकि मेरा प्लान नहीं था स्पोर्ट्स करने का। मेरे परिवार में कोई स्पोर्ट्स नहीं करता। यहां तक कि गांव में भी स्पोर्ट्स का कोई माहौल नहीं था। यह बस इत्तेफाक था।’
उन्होंने कहा कि यह संयोग ही था मैंने जैवलिन फेंकना शुरू किया। नीरज ने सभी का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने दिल से मेहनत की और सीनियर्स व कई लोगों का सपोर्ट मिला तो मैं यहां आज आपके सामने बैठा हूं।’
-एजेंसियां

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