अंतिम सफर पर निकले नीरज, दुनिया को कहा अलविदा

‘जब चले जाएंगे हम लौट के सावन की तरह, याद आएंगे प्रथम प्यार के चुंबन की तरह..’गीत, गजलों और कविताओं के कारवां को पीछे छोड़ शब्दों के जादूगर पद्मश्री गोपालदास नीरज ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनका पार्थिव शरीर शनिवार सुबह आगरा के बल्केशवर स्थित उनकी स्वर्गीय पत्नी मनोरमा के निवास पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया।
मंचों से नीरज जी कहते थे कि चलता हूं, अभी चलता हूं, गीत एक और जरा झूम के गा लूं तो चलूं। लेकिन आज गीत ऋषि चिर निद्रा में लीन है। अब चाहे रुबाई चुप हो, कितना ही सन्नाटा हो, नीरज नहीं आएंगे। नहीं आएंगे, यही सोचकर तो लोग गमगीन हैं। साहित्य के तपस्वी को खिराज के अकीदत पेश करने आए लोगों की पलकें भींग गईं।
गीत के जादूगर के अंतिम दर्शन को सुबह से जो दीवाने आने शुरू हुए हैं, सिलसिला एक पल भी टूट नहीं रहा। डीएम, एसएसपी, कवि और नेता कुमार विश्वास भी पहुंचे। उन्होंने नीरज को भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। हर आंख नम है, हर दिल मे गम है, मृत्यु गीत के रचयिता का आखिरी कारवां आंसुओं से भींगा है।
कवि कुमार विश्वास ने कहा कि नीरज लोकप्रियता का पैमाना थे। उनके गीतों पर नेहरूजी झूमे और अटलजी भी, देवानंद भी और राजकपूर भी। नीरज मृत्यु के दूत से भी ऐसे बात करते थे, जैसे हमसे। कहते थे, कुंडली देख ली है, 100 वर्ष तक जीऊंगा। सच तो यह है कि गम को मुस्कान की भाषा देने वाले नीरज के लिए के लिए आंसू भी रो रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव भी प्रख्तात गीतकार के अंतिम दर्शन करने पहुंचे। उन्हें श्रद्धा सुमन अपर्ति किए। अखिलेश ने कहा कि नीरज जी जीवित रहेंगे अपने अमर गीतों से, कविताओं और इंसानियत से। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आई तो इटावा में उनकी याद में स्मृति भवन बनवाएंगे। आगरा में गोपालदास नीरज की स्वर्गीय पत्नी मनोरमा के निवास पर करीब दो घंटे तक उनके पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन करने के लिए रखा गया। यहां से अब उनका पार्थिव शरीर अलीगढ़ के रवाना कर दिया गया है। जहां नुमाइश मैदान में लोग दो घंटे तक अंतिम दर्शन कर सकेंगे।
-एजेंसी

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