नीम ऐसी औषधि है जो त्रिदोष विकारों को दूर करता है

Neem is a medicine that removes Tridosha in Body
नीम ऐसी औषधि है जो त्रिदोष विकारों को दूर करता है

नीम ऐसी औषधि है जो त्रिदोष विकारों को दूर करता है, इसके पत्ते, फूल, फल, छाल, शाखाएं आदि औषधि के रूप में प्रयोग की जाती हैं। नीम के फल (निम्बोली) से बीज निकलता है जिससे तेल मिलता है। नीम के तने से गोंद मिलता है। ये भी दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है।

नीम हल्का, कटु−तिक्त, कषाय शीतल होता है, जो तीन प्रकार के दोषों अर्थात वात, पित्त और कफ संबंधी विकारों का नाश करता है। यह कब्ज मलेरिया, पीलिया, कुष्ठ प्रदर, सिर दर्द, दांत संबंधी रोगों और त्वचा रोगों में गुणकारी होता है। यह बहुत ही अच्छा रक्तशोधक तथा कीटाणुनाशक होता है।

उपदंश और कुष्ठ के उपचार के लिए इसे सर्वोत्तम औषधि माना गया है।

होम्योपैथी के अनुसार पुराने जीर्ण रोगों के लिए सबसे अच्छी दवा नीम है। नीम का तेल जो कि गंध व स्वाद में कड़वा होता है प्रथम श्रेणी की कीटाणुनाशक होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुर्गंधनाशक, वातहर तथा शीतपित्त, कुष्ठ तथा पायरिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी होता है।

नीम के फायदे-
– बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम तथा कनेर के पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस कर लगाने से लाभ होता है।
– नीम के पत्तों तथा मूंग दाल को मिलाकर पीस कर बिना मसाले डाले तलकर खाने से भी इस रोग में आराम मिलता है।
– बुखार या मलेरिया होने पर नीम का काढ़ा दिया जा सकता है। इस काढ़े को बनाने के लिए एक गिलास पानी में नीम के पत्ते, निम्बोली, काली मिर्च, तुलसी, सोंठ, चिरायता बराबर मात्रा में डालकर उबालें।

-मलेरिया में नीम की पत्तियों को फिटकरी तथा पानी के साथ मिलाकर गोली के रूप में बुखार के एक घंटा पहले तथा एक घंटा बाद में दें। इससे भी मलेरिया ठीक हो जाता है।

-मसूढ़ों के रोगों के उपचार में नीम से बनी दातुन का कोई सानी नहीं है। नीम की पत्तियों को उबाल कर ठंडा करके चबाने से पायरिया में आराम मिलता है।

– नीम के फूल के काढ़े से गरारे करने और नीम की दातुन का प्रयोग करने से हम दांत और मसूढ़ों से संबंधित रोगों से बच सकते हैं।

– पथरी की समस्या से निपटने के लिए लगभग 150 ग्राम नीम की पत्तियों को 21 लीटर पानी में पीसकर उबालें और पी लें इससे पथरी निकल सकती है।

-पथरी यदि गुर्दे में है तो नीम के पत्तों की राख की लगभग 2 ग्राम मात्रा प्रतिदिन पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है।

– रात को सोते समय इस मिश्रण की एक−दो बूंद लेने से कान का बहना रुकता है। गुनगुने नीम के तेल की दो−तीन बूंदें कान में टपकाने से कान के दर्द में राहत मिलती है।

-पेट संबंधी अनेक समस्याओं से निजात पाने में भी नीम सहायक होता है। नीम के फूलों को गर्म पानी में मसलकर व छानकर सोते समय पीने से कब्ज दूर होती है।

-नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर दिया जाना चाहिए। पेचिस होने की स्थिति में नीम की भुनी हुई अतर छाल का चूर्ण दही में मिलाकर लेना चाहिए।

-जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। –नीम के पत्ते, छाल और निम्बोली को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसने से बने लेप से त्वचा पर होने वाले फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

-नीम के पत्तों को दही में पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाती है।

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