प्रोफेसर की बहाली पर BHU के कुलपति से NCW द्वारा रिपोर्ट तलब

वाराणसी। यौन उत्पीड़न के मामले में BHU (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के एक प्रोफेसर के निलंबन को रद्द किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए BHU के कुलपति से रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले BHU प्रशासन ने रविवार को अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के बाद छेड़खानी के आरोपों का सामना कर रहे जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एस के चौबे को लंबी छुट्टी पर भेज दिया था।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सोमवार को BHU के कुलपति राकेश भटनागर को लिखे पत्र में कहा कि वह इस मामले की रिपोर्ट दें।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले में अपने आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट भी आयोग को मुहैया कराए। BHU में यौन उत्पीड़न के मामले में प्रोफेसर चौबे को निलंबित किया गया था लेकिन फिर उनका निलंबन निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ छात्राओं ने धरना देते हुए आरोपी प्रोफेसर को बर्खास्त करने की मांग की थी।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, BHU के जंतु विज्ञान विभाग की ओर से वर्ष 2018 में पुणे में शै‍क्षणिक टूर के दौरान प्रोफेसर एस के चौबे पर छात्राओं के साथ अश्‍लील हरकत करने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी विश्‍वविद्यालय ने उन्‍हें कुछ दिनों पहले ही बहाल कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर आक्रोशित छात्राओं ने शनिवार की देर शाम मुख्‍य द्वार पर पहुंच प्रोफेसर को बर्खास्‍त करने की मांग करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू किया जो पूरी रात चलता रहा। रातभर दर्जनों छात्र-छात्राएं मुख्‍य द्वार के नीचे ही बैठे रहीं। रविवार को भी BHU प्रशासन के अफसरों ने छात्राओं से बातचीत करने का प्रयास किया, हालांकि BHU प्रशासन की ओर से मामले पर पुनर्विचार का आश्‍वासन बेअसर रहा।
इस मामले को लेकर रविवार दिन भर विश्वविद्यालय में बैठकों का दौर जारी रहा। इसके बाद शाम को यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि इस मामले को एक बार फिर कार्यकारिणी परिषद के समक्ष रखा जाएगा और जब तक परिषद इस पर विचार करे तब तक के लिए प्रोफेसर एस के चौबे को लंबी छुट्टी पर जाने के लिए आदेश दिया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के बयान में यह भी कहा गया कि BHU का प्रशासन विश्‍वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव अथवा उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति संवेदनशील है और प्रकार की घटनाओं को बर्दाश्‍त नही किया जाएगा।
-एजेंसियां

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