NCLAT का आदेश, Cyrus Mistry फिर से बनेंगे टाटा संस के चेयरमैन

नई द‍िल्ली। NCLAT (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण) ने Cyrus Mistry को टाटा संस का एक बार फिर से चेयरमैन नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही एनसीएएलटी ने एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर नियुक्ति को अवैध माना है। एनसीएएलटी ने कहा कि Cyrus Mistry की नियुक्ति आदेश की तारीख से चार हफ्ते के भीतर लागू हो जाएगी।
चंद्रशेखरन फरवरी 2017 में चेयरमैन बने थे। एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ अपील के लिए टाटा सन्स ने 4 हफ्ते का वक्त मांगा। एनसीएलएटी ने इसकी मंजूरी दे दी।

इससे पहले मिस्त्री ने अपनी बर्खास्तगी को एनसीएलटी में चुनौती दी थी, जहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। एनसीएलटी की मुंबई पीठ के नौ जुलाई के आदेश के विरुद्ध अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष एक याचिका दाखिल की गई।

नौ जुलाई को एनसीएलटी मुंबई ने बर्खास्तगी के विरुद्ध मिस्त्री की याचिका को खारिज करने के साथ ही रतन टाटा और कंपनी के बोर्ड के विरुद्ध खुल्लम खुल्ला दुर्व्यवहार के आरोप को भी खारिज कर दिया था। कंपनी कानून 2013 के मुताबिक एनसीएलटी के आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी जा सकती है।

टाटा संस-सायरस मिस्त्री मामले की अब तक की घटनाएं इस प्रकार हैं :

24 अक्तूबर, 2016 : टाटा संस ने सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से बर्खास्त किया। रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया।
25 अक्तूबर, 2016 : मिस्त्री ने टाटा संस के बोर्ड को पत्र लिखा, टाटा के ट्रस्टी द्वारा क्षद्म नियंत्रण का लगाया आरोप।
19 दिसंबर, 2016 : मिस्त्री ने टाटा समूह की सभी कंपनियों के निदेशक पद से इस्तीफा दिया।
20 दिसंबर, 2016 : मिस्त्री ने एनसीएलटी में याचिका दाखिल कर अल्पमत शेयरधारकों के दमन और कुप्रबंधन का आरोप लगाया।
12 जनवरी, 2017 : टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन नियुक्त किया।
6 फरवरी, 2017 : मिस्त्री को टाटा संस के बोर्ड से निदेशक पद से हटाया गया।
21 सितंबर, 2017 : टाटा संस के बोर्ड ने प्राइवेट कंपनी बनने की योजना को मंजूरी दी।
12 जून, 2018 : एनसीएलटी ने फैसले के लिए चार जुलाई की तिथि तय की।
4 जुलाई, 2018 : एनसीएलटी ने फैसले की तिथि को बढ़ाकर नौ जुलाई किया।
9 जुलाई, 2018 : एनसीएलटी ने मिस्त्री की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन पद से बर्खास्त किए जाने को चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मिस्त्री को बोर्ड से इसलिए हटाया गया, क्योंकि बोर्ड और उसके सदस्यों का उन पर से विश्वास खत्म हो गया था।
– एजेंसी

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