Navchetan ने किया स्व. श्री गोविन्द लाल चतुर्वेदी शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन

Navchetan संस्था के द्वारा किए गए कार्यों का चलचित्र प्रर्दशित किया गया व रूपरेखा संस्थापक अरविंदम चतुर्वेदी नेे प्रस्‍तुत की

मथुरा। सामाजिक संस्था Navchetan (एक आवाह्न) द्वारा शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर ज्ञानदीप शिक्षा भारती परिसर में स्व. श्री गोविन्द लाल चतुर्वेदी शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन कर जनपद के कर्मठ सुयोग्य एवं नवाचारी शिक्षकों का सम्मान किया गया।

Navchetan Organizing Shri Govind Lal Chaturvedi Teachers' felicittion Programme
Navchetan Organizing Shri Govind Lal Chaturvedi Teachers’ felicittion Programme

कार्यक्रम का शुभारंभ पद्म श्री मोहन स्वरूप भाटिया, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री पंडित श्याम सुन्दर शर्मा, विधायक पूरन प्रकाश, डॉ अजय शर्मा, अरविंदम चतुर्वेदी व भावना शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में सरस्वती वंदना पूनम वर्मा एवं मंगलाचरण आचार्य जगदीश चतुर्वेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत अरविंदम चतुर्वेदी, भावना शर्मा, सोमनाथ चतुर्वेदी, अशोक, संदीप कुलश्रेष्ठ व सुरेन्द्र ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में Navchetan संस्था के द्वारा किए गए कार्यों का चलचित्र प्रर्दशित किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा Navchetan संस्था के संस्थापक अरविंदम चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत की गई।

शिक्षक सम्मान समारोह पर पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री पंडित श्याम सुन्दर शर्मा ने कहा कि शिक्षा मनुष्य के जीवन में पर प्रर्दशक के साथ-साथ जीवन जीने की कला भी सिखाती है। अगर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी का सही से निर्वहन करेंगे तो समाज को सही दिशा प्राप्त होगी।
पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने बताया कि आज शिक्षा कहीं न कहीं भटकी हुई महसूस होती है। आज ऐसे आदर्श शिक्षकों की आवश्यकता है जो नयी पीढ़ी को सही दिशा दें और समाज में फैली हुई कुरुतियों को दूर करने में आगे आए। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक कृष्ण पाल सिंह ने कहा कि गुरु की महिमा अपरम्पार है। गुरु के ऋण व उपकारों का बदला जीवन में किसी भी रूप में नहीं चुकाया जा सकता है। गुरु सदैव वंदनीय है।

मथुरा नगर निगम के महापौर मुकेश आर्य बंधु ने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान मिलना मुश्किल है। एकलव्य ने भी गुरु की मूर्ति स्थापित करके ज्ञान प्राप्त किया था। शिक्षकों का सम्मान आवश्यक है क्योंकि उनके बिना अच्छे समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। शिक्षाविद डॉ अजय शर्मा ने कहा कि सम्मान हमें नयी जिम्मेदारी सौंपते हैं, आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं आदर्श शिक्षक का सम्मान पाकर हमें और अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। तभी समाज के अच्छे विद्यार्थी पैदा होंगे।

प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश मंत्री देव प्रकाश ने कहा कि विधार्थी व शिक्षक का रिश्ता सबसे पवित्र रिश्ता है। अगर शिक्षक मन लगाकर पूरे विश्वास के साथ अपने कार्य को करते रहेंगे तो निश्चित तौर पर विद्यार्थियों के अंदर अच्छे संस्कार,समझ एवं आत्मविश्वास उत्पन्न होगा। वह सच्चे राष्ट्र के सेवक के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर पायेंगे।

समाजसेवी गजेन्द्र शर्मा ने कहा कि गुरु हमारे जीवन की आधारशिला रखते हैं। गुरु हमारे मस्तिष्क में ज्ञान का दीप प्रज्वलित कर हमें मनुष्य बनने के लिए दिशा प्रदान करते हैं।ज्ञान के बिना मनुष्य को व्यक्ति नहीं कहा जा सकता।

युवा उद्योगपति एवं समाजसेवी पवन चतुर्वेदी ने कहा कि स्व. गोविन्द लाल चतुर्वेदी उनके गुरु रहे हैं। वह एक आदर्श शिक्षक थे व सदा अपने सद्कार्यों से अपने विद्यार्थियों को प्रेरित करते रहे। आज के समय में आदर्श शिक्षकों का अभाव है।

कार्यक्रम में डॉ शालिनी अग्रवाल, अनिल यदुवंशी, डॉ शिशुपाल सिंह, डॉ नीता सिंह, अतुल जैन, पुष्पलता गुप्ता, डॉ नीलम माहेश्वरी, डॉ सुनील चतुर्वेदी, श्रीमती शालिनी भट्ट,विजय कृष्ण सारस्वत, सुनील डागौर, जितेन्द्र सिंह विमल, डॉ राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, श्वेता शर्मा, डॉ सतनाम अरोड़ा आदि प्रधानाचार्य शिक्षकों का सम्मान किया गया।

इस अवसर पर पार्षद रामदास चतुर्वेदी, पार्षद श्वेता शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार व डॉक्युमेंट्री मेकर निहारिका बंसल, वरिष्ठ पत्रकार लोकसभा टीवी दिल्ली से अमरेन्द्र गुप्ता, वृन्दावन बाल विकास मंच के अध्यक्ष अनूप शर्मा, संस्थाएं दो कदम, रक्तदाता फाउंडेशन, सद्भावना प्रशिक्षण केन्द्र,स्ट्रीट चाइल्ड,मिशन पॉसिबल,नवी भारत, राष्ट्रवादी पार्टी भारत, डिजायर टू सक्सीड, अपराध निरोधक समिति, आयुर्वेद मातृछाया, कोमल फाउंडेशन, संस्कार भारती,एस एफ सोसायटी, शंखनाद,श्री राधा कृष्ण समिति, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार समिति, आदि का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्म श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि शिक्षक हमारी शिक्षा प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। पहली शिक्षक मां होती है और उसके बाद जीवन भर ज्ञान देने वाले मनीषि गुरुओं का सानिध्य प्राप्त होता रहता है। आदर्श गुरु वही होता है जो अपने शिष्य में छिपी हुई संभावनाओं को तलाश कर एक प्रतिभाशाली, समृद्ध, सुशील एवं आदर्श शिष्य तैयार कर सकता है। जो कि अपने परिवार समाज एवं राष्ट्रहित में उत्कृष्ट कार्य कर सकें।

धन्यवाद ज्ञापन-संस्था की अध्यक्षा भावना शर्मा व महासचिव संदीप कुलश्रेष्ठ ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ दीपक गोस्वामी ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा सचिव प्रियंका शर्मा, माला दुवे,जाग्रति कुलश्रेष्ठ, रजनी पैड्रो, दीपाली वर्मा, गुरविंदर, पूनम वर्मा, महेंद्र मलिक, अंजू शर्मा, सुनीता शर्मा, रोहित कुमार, दिनेश यादव व अनिल शर्मा उपस्थित रहे।

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