कोलकाता में खनका नौटंकी का नगाड़ा, बंगाली कलाकारों द्वारा ‘भाई हो तो ऐसा’ का मंचन

ब्रज की नौटंकी उत्‍तर भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेष हरियाणा आदि कुछ प्रदेषों में भी लोकप्रिय रही है किन्तु यह पहला अवसर है कि ब्रज की गायन, वादन, नृत्य की त्रिवेणी से समृद्ध नौटंकी की सुरभि कोलकाता की सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था पदातिका तक पहुँची और संस्था के मूल रूप से बंगला भाशा भाशी कलाकारों ने ब्रज-नौटंकी के ख्याति प्राप्त कलाकार किषन स्वरूप पचैरी द्वारा लिखित एवं निर्देषित नौटंकी ‘भाई हो तो ऐसा’ का 30 दिवसीय कार्यशाला के पश्‍चात् प्रभावी मंचन किया।

संगीत नाटक अकादमी कोलकाता के सौजन्य से ‘ पदातिका ’ द्वारा आयोजित समारोह में मंच पर जब नौटंकी का नगाड़ा खनका तो दूर-दूर तक गूँजी आवाज सुनकर सभागार दर्षकों से भर गया। अब तक रवीन्द्र संगीत और बंगला लोकनाट्य ‘माच’ से अलग षैली में प्रस्तुत ‘ भाई हो तो ऐसा ’ के मंचन से सभागार तालियों से गूँजता रहा और कायक्रम के समापन पर आयोजकों ने किषन स्वरूप पचैरी का माल्यार्पण एवं षाल उड़ाकर अभिनन्दन किया।

‘ भाई हो तो ऐसा ’ के कलाकार थे-दषरथ दास, सरफराज खान, सुरुचि वर्मा, निकुन्ज बनर्जी, नीरज षाह, रोहित भारद्वाज इजमाम, कृश्णा, विष्व बन्धु दीप, रष्मि, सुपन्दा, सम्राट सिंह, षुभोदास, सुपनदास, देवोदास,
सुखमय, देवाषीश, सोमू, स्मित सिंह गोपालदा, असगर भाई, लक्ष्मी तथा समन्वयक प्राची कानौड़िया।

नौटंकी ‘ भाई हो तो ऐसा ’ की परिकल्पना सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं निर्देषक संदीपन विमल कान्त नागर द्वारा की गई थी। कोलकाता में ब्रज की नौटंकी के प्रसार पर उत्तर प्रदेष संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन स्वरूप भाटिया ने बधाई देते हुए आषा व्यक्त की है कि सषक्त विधा के कारण नौटंकी दक्षिण भारत तक लोकप्रियता प्राप्त करेगी।