राष्ट्रीय वन शहीद दिवस आज, वन माफियाओं से मुकाबला करतें हैं वनरक्षक

आप सभी जानते हैं हमारे जीवन में जल ,जमीन ,जंगल की क्या मह्तता है| हमारा जीवन नहीं होता अगर वायु ,जल ,जमीन और जंगल नहीं होते लेकिन जिस तरीके से हम अपने स्वार्थ के लिए जल, जमीन, जंगल आदि का दोहन कर रहे हैं उससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है| पर्यावरण के संतुलन के साथ हमारा जीवन भी कष्ट में होता जा रहा है| आज इसी पर्यावरण के संतुलन हेतु हमें अपने वनों की रक्षा करनी चाहिए। वनों को और पशु पक्षियों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करती है चाहे वो केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार।

आज हम यह बात कर रहे हैं कारण आज ११-९-२० राष्ट्रीय वन शहीद दिवस (National Forest Martyr Dayद्व है। जी हां, आज उन्हीं वनरक्षक अर्थात वन अधिकारी व कर्मचारी जिन्होंने वनों की और पशुओं की रक्षा करते हुए अपने जीवन को दांव पर लगा दिया और शहीद हो गए ऐसी ही शहादत देने वाले १४०० कर्मचारियों को नमन किया जाता है और श्रद्धा सुमन दी जाती है।

हमारे वनों की और पशुओं की रक्षा यह सिपाही सीमा पर खड़े एक सैनिक करते हैं, सिविल पुलिस से कम जोखिम भरा काम नहीं है इनका जोखिम उस वक्त और बढ़ जाता है जब इन्हें बिना हथियार के जंगलों में अपने वनों की ,अपने पशुओं की रक्षा करनी पड़ती है वह भी वन माफियाओं और जंगली जानवरों से। सरकार वन रक्षकों को सिविल पुलिस और सैनिकों या अन्य रक्षकों से कम आकती है चाहे उसमें वेतन का मामला हो चाहे प्रोत्साहन का मामला हो या अपनी सुरक्षा या वनों की सुरक्षा हेतु । वन और पशु राष्ट्रीय संपत्ति है जिसका सीधा लाभ पूरे देश को अच्छी पर्यावरण के रूप में मिलता है अतः सरकार को चाहिए इनकी सेवाओं को और सुविधाओं को और इनके परिवार की तरक्की के प्रति भी सरकार की जिम्मेदारी का निर्वहन करे। अगर हमारे वनरक्षक सुविधा से परिपूर्ण होंगे तो वह अपना कर्तव्य और लगन व ईमानदारी से पूरा करेंगे जिससे हमें एक शुद्ध वातावरण भी मिलेगा ।

लोकस्वर की श्रीमती संध्या शर्मा का कहना है वनरक्षक किसी से भी कम नहीं है वह वीरप्पन जैसे वन माफियाओं से भी मुकाबला करते हैं जी हां यह वही वनरक्षक वन कर्मचारी हैं जो अपनी सोच हिम्मत से हमारे वनों की व पशु पक्षियों रक्षा करती हे बिना हत्यार के ।

लोकस्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता कहते हैं आज राष्ट्रीय वन शहीदी दिवस पर मैं भारत के नागरिको से प्रार्थना करता हूं कि वह वनों की व पक्षियों की खुद भी रक्षा करे क्योंकि हम सारी जिम्मेदारी बहुत कम कर्मचारियों के ऊपर देंगे तो निश्चित मानिए आने वाले समय पर पर्यावरण को बचाना और मुश्किल हो जाएगा । यही हमारी अपने शाहिद वन अधिकारी और कर्मचारियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।मैं पुनः एक बार सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को नमन करता हूं और संस्था की तरफ से सभी अधिकारियो कर्मचारियों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं

– राजीव गुप्ता, जनस्नेही कलम से
परिवहन संपदा

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