मिशन शक्ति पर NASA की आशंका को DRDO ने पूरी तरह खारिज किया

नई दिल्‍ली। भारत द्वारा अपने एक लाइव सैटलाइट को मार गिराने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) की तरफ से खतरे की आशंका जताने और कई तरह के सवाल खड़े होने के बाद शनिवार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मिशन शक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट की। एजेंसी के चीफ जी. सतीश रेड्डी ने साफ कहा कि 45 दिनों के भीतर सभी मलबा नष्ट हो जाएगा।
दरअसल, नासा की तरफ से आशंका जताई गई थी कि सैटेलाइट के मलबे से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) को खतरा पैदा हो सकता है। इस दौरान ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देने के लिए प्रेज़ेंटेशन भी दिया गया।
रेड्डी ने कहा कि भारत ने इस तरह का कदम उठाते हुए टारगेट को नष्ट करने की क्षमता दिखाई तो हमने ऐसे ऑपरेशंस के लिए अपनी क्षमता साबित की है। डीआरडीओ चीफ ने कहा कि डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है। मिशन शक्ति पर रेड्डी ने कहा कि देश ने जमीन से ही सीधे टारगेट को हिट करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है और यह डिफेंस के लिए भी काम करता है। उन्होंने कहा कि मिलिटरी डोमेन में भी स्पेस का महत्व बढ़ा है।
नासा ने क्या कहा था?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने भारत के मिशन ‘ऑपरेशन शक्ति’ को बेहद भयानक बताते हुए कहा था कि इसकी वजह से अंतरिक्ष की कक्षा में करीब 400 मलबे के टुकड़े फैल गए हैं। नासा ने कहा कि इससे आने वाले दिनों में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है।
चिदंबरम के बयान पर बोले DRDO चीफ
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा था कि एक बुद्धिमान सरकार अपनी क्षमता को सीक्रेट रखती है, केवल मूर्ख सरकार ही डिफेंस सीक्रेट का खुलासा करती है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के पास कई वर्षों से सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता मौजूद है।
चिदंबरम के बयान पर सतीश रेड्डी ने कहा कि टेस्ट होने के बाद इस तरह के मिशन को सीक्रेट नहीं रखा जा सकता। सैटेलाइट को दुनियाभर में कई स्टेशनों द्वारा ट्रैक किया जाता है। इसके लिए सभी आवश्यक अनुमति ले ली गई थी। इस दौरान उनसे यह पूछा गया कि इस तरह के परीक्षण को करने के बाद सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी, क्या चुनावी मौसम में इसके बारे में बताने से पहले सभी संबंधित संस्थानों से मंजूरी ली गई थी।
इस सवाल के जवाब में रेड्डी ने कहा कि टेस्ट के बाद इस तरह के मिशन को तकनीकी रूप से गुप्त नहीं रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मिशन के लिए सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन ने भी इस तरह के परीक्षणों को करने के बाद दुनिया को इसकी जानकारी दी थी।
कैसे पूरा हुआ मिशन शक्ति?
डीआरडीओ ने मिशन शक्ति पर एक प्रेज़ेंटेशन भी पेश किया। इसमें बताया गया कि इस टेस्ट की दिशा में पहला कदम उस समय बढ़ाया गया जब 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने DRDO से चुनौतीपूर्ण तकनीक पर काम करने को कहा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उसके बाद सब्जेक्ट पर DRDO के साथ कई बैठकें कीं। आखिरकार टेस्ट के लिए 2016 में पीएम ने हरी झंडी दी। कक्षा में मौजूद सैटेलाइट को गिराने के साथ ही उद्देश्य यह भी था कि इस दौरान दूसरे स्पेस असेट्स को कोई नुकसान न हो।
लोअर ऑर्बिट में हाई स्पीड के कारण मल्टी-स्टेज इंटरसेप्टर मिसाइल को हिट टु किल क्षमता वाली अडवांस्ड टेक्नोलॉजीज के साथ तैयार किया गया। करीब 150 वैज्ञानिकों ने 2 साल तक इस प्रोजेक्ट पर काम किया। सिस्टम और अन्य उपकरणों के लिए कई भारतीय कंपनियों ने सहयोग किया।
जनवरी 2019 में रेडार, कम्युनिकेशन नेटवर्क आदि स्थापित किए गए। आखिरकार 27 मार्च को सुबह मिसाइल लॉन्च की गई और उसने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को हिट किया।
जब 27 मार्च को PM ने किया ऐलान
27 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि भारत ने ऐंटी-सैटेलाइट मिसाइल से एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया और अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर दर्ज कराया। भारत ऐसी क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। अंतरिक्ष में 300 किमी दूर पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है।
-एजेंसियां

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