NASA के स्पेसक्राफ्ट ने क्षुद्रग्रह एस्टेरॉयड की तस्वीर भेजी

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के लिए 2019 की शुरुआत शानदार रही। गुरुवार को नासा ने बताया कि उसके एक स्पेसक्राफ्ट ने सूरज से 400 करोड़ मील दूर तैर रहे क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) की तस्वीर भेजी है। इस क्षुद्रग्रह को ‘अल्टिमा थुली’ नाम दिया गया है। यह ग्रीक-लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है ‘ऐसी जगह, जहां तक कोई न पहुंचा हो’। NASA वैज्ञानिकों के मुताबिक ‘अल्टिमा थुली’ किसी बड़े स्नोमैन जैसा दिखता है। स्नोमैन बर्फ से बने इंसाननुमा आकृति को कहा जाता है।
किस एयरक्राफ्ट ने भेजी ‘अल्टिमा थुली’ की तस्वीर
NASA ने साल 2006 में अंतरिक्ष की जांच के लिए ‘न्यू हॉरिजॉन्स’ नाम का एक मिशन शुरू किया था। इसी के तहत अंतरिक्ष में एक स्पेसक्राफ्ट भेजा गया, जिसका मकसद धरती से करोड़ों मील दूर ग्रहों के पास से गुज़रकर उनकी जानकारी इकट्ठा करना था। 2006 में लॉन्चिंग के समय इसका लक्ष्य सौरमंडल के आखिरी ग्रह प्लूटो की स्टडी करना था। प्लूटो को हिंदी में यम कहते हैं, जिसे 2006 में ही 9 ग्रहों की लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। NASA का स्पेसक्राफ्ट 2015 में प्लूटो के पास पहुंचा, जिसके बाद इसका अगला लक्ष्य प्लूटो के आसपास मौजूद और तत्वों की स्टडी करना था। मंगलवार को यह स्पेसक्राफ्ट ‘अल्टिमा थुली’ के पास से गुज़रा।
पहली बार कब देखा गया
‘अल्टिमा थुली’ को पहली बार 2014 में खगोलविदों ने टेलिस्कोप के ज़रिए देखा था। अब ‘न्यू हॉरिजॉन्स स्पेसक्राफ्ट’ से इसकी मौजूदा तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि यह अंतरिक्ष में मौजूद सबसे दूर और सबसे पुराना तत्व है, जिसे अब तक कोई स्पेसक्राफ्ट ऑब्ज़र्व कर पाया है। स्पेसक्राफ्ट के ‘अल्टिमा थुली’ को देखने से पहले वैज्ञानिकों के पास इसकी एक ब्लर तस्वीर थी, जिसमें यह किसी मूंगफली जैसा दिख रहा था।
कैसे बना था ‘अल्टिमा थुली’
NASA ने एक तस्वीर के ज़रिए समझाने की कोशिश की है कि ‘अल्टिमा थुली’ बना कैसे था। वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले कई छोटे-छोटे तत्व गुरुत्वाकर्षण की वजह से नज़दीक आए और आपस में जुड़ गए। आखिर में दो बड़े टुकड़े बनने के बाद वो दोनों एक-दूसरे के नज़दीक आए और आपस में चिपक गए। इसी से ‘अल्टिमा थुली’ बना।
‘अल्टिमा थुली’ की खास बातें
NASA के मुताबिक इसकी लंबाई 21 मील यानी 33 किमी है और यह 298 साल में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है। यह अपना चक्कर 15 घंटे में पूरा करता है। सतह पर बर्फ जमी होने की वजह से यह चमकीला दिखता है। सूर्य की किरणें जितनी तेज धरती पर पड़ती हैं, उससे 1600 गुना कम ‘अल्टिमा थुली’ पर पड़ती हैं।
वैज्ञानिक इसके बारे में क्या कह रहे हैं
NASA के लीड इन्वेस्टिगेटर एलन स्टर्न ने बताया कि इसकी लेटेस्ट तस्वीर 27000 किमी की दूरी से और 140 मीटर प्रति पिक्सल से खींची गई है। एक और वैज्ञानिक कार्ली हॉवेट के मुताबिक बर्फ की चमक के बावजूद वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि ‘अल्टिमा थुली’ लाल रंग का है। वैज्ञानिक इसकी तस्वीर को अभूतपूर्व खोज मान रहे हैं।
-एजेंसियां

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