ख़ुद को दूसरों से महान समझने के भ्रम में रहते हैं आत्ममुग्ध लोग

आत्ममुग्ध यानी ख़ुद पर ही मुग्ध या मोहित रहने वाले लोग. अंग्रेज़ी में इन्हें Narcissist कहा जाता है. ये वो लोग होते हैं जो ख़ुद को दूसरों से बेहतर और महान समझने के भ्रम में रहते हैं.
आत्ममुग्ध लोग ख़ुद को ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत देते हैं और इन्हें दूसरों के आकर्षण का केंद्र बनना पसंद होता है.
कई बार आप सोचते होंगे कि कोई फ़ेसबुक पर अपनी ही डीपी पर ‘लव’ रिऐक्शन कैसे दे सकता है या सोते-उठते ‘आई लव माइसेल्फ़’ लिखकर फ़ोटो कैसे पोस्ट कर सकता है?
ये अजीब और झुंझलाहट भरा भले ही लगता हो लेकिन सच तो ये है कि बहुत से लोग ऐसा करते हैं और मुद्दे की बात यह है कि ऐसे लोग अपनी ज़िंदगी में काफ़ी ख़ुश रहते हैं.
मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि आत्ममुग्ध लोग अजीब तो होते हैं लेकिन वो बाकियों के मुकाबले ज़्यादा ख़ुश रहते हैं.
कई बार आप सोचते होंगे कि कोई फ़ेसबुक पर अपनी ही डीपी पर ‘लव’ रिऐक्शन कैसे दे सकता है या सोते-उठते ‘आई लव माइसेल्फ़’ लिखकर फ़ोटो कैसे पोस्ट कर सकता है?
उत्तरी आयरलैंड की क्वीन्स यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिकों ने Narcissism (आत्ममुग्धता) पर शोध किया जिसमें पता चला कि आत्ममुग्ध लोग आसानी से डिप्रेशन और तनाव के शिकार नहीं होते.
अध्ययन में ये भी सामने आया कि आत्ममुग्ध लोगों का रवैया अक्सर दूसरों को परेशान करता है लेकिन वो इसकी परवाह नहीं करते.
इस रिसर्च की अगुवाई करने वाले मनोवैज्ञिक डॉक्टर कोस्टास पैपॉजॉर्ज का कहना है कि आत्ममुग्ध होने के अपने फ़ायदे हैं.
शोधकर्ता ये समझने की कोशिशों में जुटे हुए हैं कि आधुनिक समाज के हर क्षेत्र में चाहे वो राजनीति हो, सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स या सेलिब्रिटी कल्चर, आत्ममुग्धता बढ़ने का चलन क्यों देखा जा रहा है. ऐसा तब है जब आत्ममुग्धता को सामाजिक तौर पर अच्छा नहीं माना जाता.
‘कम शर्म और कम पछतावा’
मनोवैज्ञानिक आत्ममुग्ध लोगों को ऐसे व्यक्तियों के रूप में परिभाषित करते हैं जो “दंभ भरा रवैया रखते हैं, ख़ुद को दूसरों से बेहतर समझते हैं, ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास से भरे होते हैं, दूसरों का दुख दर्द कम समझते हैं और जिनमें कम शर्म, कम पछतावा होता है.”
मनोवैज्ञानिक ये समझने की कोशिश भी कर रहे हैं कि इतनी नकारात्मक आदतों के बावजूद आत्ममुग्ध लोग अमूमन फ़ायदे में क्यों रखते हैं.
मनोवैज्ञानिक आत्ममुग्धता को इंसानों का ‘स्याह पहलू’ मानते हैं. ये कुछ-कुछ वैसा ही है जैसी ‘साइकोपैथी’ (एक तरह का पर्सनैलिटी डिसऑर्डर) और ‘सैडिज़्म’ (दूसरों के दुख में ख़ुशी होने की आदत).
‘सत्ता के करीब पहुंचने में कामयाब’
हालिया रिसर्च से ये भी पता चला है कि आत्ममुग्ध लोग कार्यक्षेत्र और निजी ज़िंदगी में अपेक्षाकृत ज़्यादा कामयाब होते हैं.
आत्ममुग्ध लोगों में एक किस्म की ‘मानसिक मज़बूती’ होती है जिसकी वजह से वो निराशा से जल्दी उबर जाते हैं.
डॉक्टर कोस्टास का मानना है कि अक्सर दूसरों के विचारों और व्यवहार को अपने ख़िलाफ़ मानते हैं. ऐसे लोग कई बार असुरक्षा की भावना से भी घिरे होते हैं.
डॉक्टर कोस्टास कहते हैं कि इन सारे नकारात्मक पहलुओं के बावजूद आत्ममुग्ध व्यक्तित्व वाले लोग कई तरह से फ़ायदे में रहते हैं.
-BBC

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