एक मुसलमान संत ने दिया Nirankari mission का संदेश

मथुरा। दिल्ली से दस दिवसीय आध्यात्मिक प्रचार यात्रा पर निकले पंडित की उपाधि से नवाजे निरंकारी प्रचारक मोहम्मद गफ्फार खान ने शुक्रवार को अंतिम पड़ाव के तहत यहां मथुरा हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर आयोजित सत्संग में Nirankari mission का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि जो जुबां से प्रभु का नाम नहीं लेता, वह मेढक के समान है, जो सिर्फ टर्रटर्र करता है। बातें करने से कल्याण होने वाला नहीं, मन-वचन और कर्म से प्रभु परमात्मा का नाम लेना होगा।

पं. गफ्फार खान जी ने रामचरित मानस की कई चौपाईयों को सुनाते हुए समझाया कि जो सत्संग ध्यान से नहीं सुनता, बातें करता है और सो जाता है, उसको सत्संग जाने से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्संग में जयकारा इसलिए लगवाया जाता है, ताकि हम जागे रहे और संतों के वचन सुनते रहे।

प्रचारक संत ने कहा कि Nirankari mission सत्य, ज्ञान, प्रेम और भाईचारे का संदेश दे रहा है। मिशन ने परमात्मा और खुदा के भेद को दूर किया है। हर इंसान को परमसत्ता से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि इसी विशेषता के कारण वह बाबा हरदेव सिंह जी के सानिध्य में निरंकारी मिशन से जुड़े थे। वर्तमान सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के नेतृत्व में आज हमें आध्यात्मिक संदेश जन-जन तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

इस मौके पर प्रचार कारवां में शामिल गीतकार सतवीर दिवाना, निशा खान, सुलतान सहित भक्ति, राम, किशोर स्वर्ण, घासीराम, हरीलाल वर्मा आदि ने भजन व विचार व्यक्त किए। संत-भक्तों का स्वागत स्थानीय संयोजक हरविंद्र कुमार ने किया। संचालन भरत कुमार ने किया।

प्रवक्ता किशोर स्वर्ण ने बताया कि दिल्ली से एक मई को दस दिवसीय आध्यात्मिक प्रचार यात्रा पर निकले निरंकारी प्रचारक पं. मोहम्मद गफ्फार खान जहांगीराबाद, खुर्जा, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, इटावा, फिरोजाबाद, जलेसर, आगरा होते हुए शुक्रवार को अंतिम पड़ाव के तहत यहां मथुरा आये। सत्संग के उपरांत प्रचार कारवां वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

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