संस्कृति यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों पर Multinational कम्पनियों की मुहर

Multinational कम्पनियांं अगले सत्र के लिए अभी से प्लेसमेंट को दिखा रही हैं रुझान

मथुरा। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वही शिक्षण संस्थान युवाओं की कसौटी पर खरा उतर सकता है जहां आधुनिकतम शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के करियर को प्रमुखता दी जाती हो। संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी के सभी मानकों पर खरा उतरती है। प्लेसमेंट की दृष्टि से बीते सत्र में जिस तरह से Multinational कम्पनियों ने यहां के छात्र-छात्राओं के बौद्धिक कौशल से प्रभावित होकर उन्हें उच्च पैकेज पर सेवा के अवसर दिए हैं, उससे आगामी सत्र भी खुशियों भरा पैगाम साबित होने वाला है।

अभी नए सत्र की शुरुआत नहीं हुई है लेकिन दर्जनों Multinational कम्पनियां यहां के छात्र-छात्राओं के तकनीकी कौशल से प्रभावित होकर उन्हें पांच से आठ लाख रुपये सालाना तक के आफर दे रही हैं। बीते सत्र में संस्कृति यूनिवर्सिटी के लगभग सभी तकनीकी शिक्षा के छात्र-छात्राओं को उच्च पैकेज पर मल्टीनेशनल कम्पनियों में जॉब के अवसर मिले हैं। इन कम्पनियों में कृष्णा मारुति लिमिटेड, द हाली-डे ग्रुप, एटीसी टायर प्राइवेट लिमिटेड, गैब्रियल इंडिया लिमिटेड, युग फार्मास्युटिकल, कोटक महिन्द्रा, बीएसीएस हाईटेक इंजीनियरिंग प्रा.लि., असाही इंडिया ग्लास लिमिटेड, अंश ग्रुप आफ इंजीनियरिंग एण्ड जीआईएस सोल्यूशंस, प्रीनव जीआईएस टेक्नोलाजीज प्रा.लि., हृदयम डिजाइन प्रा.लि., पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शंस, स्नो ह्वाइट इंफ्रास्ट्रेक्चर, स्पार्क्स आई.टी. सोल्यूशंस, आईसीआईसीआई बैंक, माइंड ट्री, राबर्ट्स बास, हीरो मोटर कार्प, इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड, सिगाराम साफ्टवेयर टेक्नोलाजी आदि शामिल हैं।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि उद्योग जगत की आवश्यकताओं को देखते हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी ने छात्र-छात्राओं को कौशलपरक शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष करने के लिए अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम में आधुनिक टेक्निक और प्रोसेस को समाहित किया है। यहां के छात्र-छात्राओं को निरंतर Multinational कम्पनियों की कार्यप्रणाली को करीब से देखने के लिए शैक्षिक भ्रमण और ट्रेनिंग पर भेजा जाता है, यही वजह है कि वे किसी भी तरह की चुनौती का आसानी से सामना कर लेते हैं। श्री गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगामी बीस वर्षों की एक प्रभावी नीति को दृष्टिगत रखते हुए काम किया जा रहा है। यहां छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक तकनीकी लैब, स्किल डेवलपमेंट विभाग, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, रोबोटिक शिक्षा, इंटर्नशिप आदि का प्रावधान है।

उपकुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि तकनीकी मानव संसाधन की आवश्यकता और उसकी पूर्ति के लिए संस्कृति यूनिवर्सिटी का व्यावसायिक एजेंसियों से भी सीधा करार है। संस्कृति यूनिवर्सिटी ने समय के साथ चलने और इसके लिए जरूरी उपायों को करने में तत्परता एवं अभिरुचि दिखाई है। सच कहें तो तकनीकी शिक्षा को लेकर भी हमारी सोच इन्हीं पहलुओं पर केन्द्रित है। श्री गुप्ता का कहना है कि तकनीकी शिक्षा ऐसा क्षेत्र है जिस पर देश के भविष्य और विकास का बड़ा दारोमदार है, यही वजह है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को कौशलपरक शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष करने के लिए हर तरह के प्रयास कर रही है।

संस्थान के कुलपति डा. राणा सिंह का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में युवाओं के करियर को संवारने के लिए कई सारे ऑप्शंस पर ध्यान दिया जाता है। यहां छात्र-छात्राओं की क्रिएटिविटी के साथ उनमें टेक्निकल स्किल्स को शार्प कर इस लायक बना दिया जाता है कि वे किसी भी बड़ी कम्पनी में सहजता से जॉब हासिल कर सकें। हर प्रोफेशनल्स युवा अपनी क्रिएटिव और टेक्निकल स्किल्स के जरिए पैरों पर खड़ा हो, यही संस्कृति यूनिवर्सिटी का मूल उद्देश्य है।

हेड कार्पोरेट रिलेशन आर.के. शर्मा का कहना है कि बीते सत्र के विषयवार प्लेसमेंट की चर्चा करें तो यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने अपने तकनीकी ज्ञान और बौद्धिक कौशल से शिक्षा पूरी करने से पहले ही अच्छी कम्पनियों में जॉब हासिल किये हैं। एम.एस.एम.ई. और संस्कृति यूनिवर्सिटी के संयुक्त प्रयासों से यहां संचालित सेण्टर आफ एक्सीलेंस छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित करता है।

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