मुल्‍ला नसरुद्दीन को मर्द की तलाश

परम पिता परमात्‍मा को लेकर हमारी तलाश कुछ इस तरह नहीं है। गौर कीजिए- एक-दो बार नहीं, कई-कई बार।
मुल्‍ला नसरुद्दीन सो रहा था चद्दर तानकर मजे से कि पता लगा घर में चोर घुस आए हैं।
पत्‍नी दौड़ी-दौड़ी आई मुल्‍ला के पास तो मुल्‍ला जोर से चिल्‍लाया- अरे…है आस-पास कोई मर्द का बच्‍चा जो चोर को पकड़ सके।
पत्‍नी ने मुल्‍ला के मुंह से यह सुनकर कहा- मुल्‍ला, क्‍या तुम मर्द के बच्‍चे नहीं हो। तुम भी तो मर्द के बच्‍चे हो, फिर बाहर आवाज़ क्‍यों लगा रहे हो।
यह सुनकर मुल्‍ला ने पहले तो कुछ सोचा और फिर चारपाई पर पड़े-पड़े ही बोला- यह तो मैं भूले बैठा था फातिमा, तूने अच्‍छा याद दिलाया।
अब ऐसा कर कि चादर तो ओढ़ा दे।