मुल्‍ला नसरुद्दीन और उसके विद्यार्थी

मृत्‍यु निश्‍चित है किंतु जीवन में सब-कुछ अनिश्‍चित है, इसलिए जीवन को बहुत अधिक नियमबद्ध मत बनाइए अन्‍यथा वो नियम ही आपके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।
मुल्‍ला नसरुद्दीन को अपनी कक्षा के शैतान विद्यार्थियों को अनुशासित करने के लिए बड़ी मशक्‍कत करनी पड़ी।
मुश्‍किल से मुल्‍ला अपने इन विद्यार्थियों को यह समझाने में सफल हुआ कि वो कुछ भी बोलने से पहले मन ही मन में कम से कम सौ तक गिनती गिनेंगे। फिर यदि बात ठीक लगे तो ही बोलेंगे।
मुल्‍ला को अपना यह प्रयोग सफल होता दिखाई दे रहा था क्‍योंकि पूरे दिन कक्षा में शांति बनी रही।
दूसरे दिन मुल्‍ला जब कक्षा में लैक्‍चर दे रहा था तो उसने सुना कि काफी छात्र एकसाथ उठ खड़े हुए और बोले- दस, बीस, तीस, चालीस, पचास, साठ, सत्तर, अस्‍सी, नब्बे और सौ…
गुरूजी, आपके कोट में आग लग गई है।