मुल्‍ला नसरुद्दीन और उसकी नकारात्‍मक सोच

नकारात्‍मक सोच और अंधा विरोध किसी भी इंसान की बुद्धि को किस कदर कुंठित कर देता है, इसका बहुत अच्‍छा उदाहरण मुल्‍ला नसरुद्दीन ने पेश किया।
सरकार ने बस यात्रा का किराया करीब-करीब 10 प्रतिशत कम कर दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके विरोध में भी एक सभा का आयोजन कर डाला।
आश्‍चर्य की बात यह कि आयोजक पार्टी ने खुद को आम जनता का हितैषी जाहिर करने के लिए जनसमान्‍य के बीच काफी पसंद किए जाने वाले मुल्‍ला नसरुद्दीन को सभा का अध्‍यक्ष बना दिया।
जब सब बोल चुके और अध्‍यक्षीय भाषण देने की बारी मुल्‍ला की आई तो मुल्‍ला ने कहा, बसों के किराए में सरकार द्वारा दस फीसदी की कमी करना पैदल चलने वालों की जेब पर डाका डालने के समान है।
सरकार के इस कदम से पहले जहां लोग 20 किलोमीटर का रास्‍ता पैदल तय करके 2 रुपए बचा लेते थे, अब वो एक भी पैसा नहीं बचा सकेंगे।