मुल्‍ला नसरुद्दीन और उसकी तरकीब

हर इंसान एक मुखौटा लेकर घूमता है जबकि उसका असली चेहरा दूसरा ही होता है। यह चेहरा देख पाना आसान नहीं होता। हां, इसे देखा जा सकता है कुछ तरकीबों से।
एक सभा में धर्मगुरू के तौर पर प्रवचन दे रहे मुल्‍ला नसरुद्दीन ने कहा, मैं भलीभांति उस व्‍यक्‍ति को जानता हूं जो किसी दूसरे व्‍यक्‍ति की पत्‍नी से प्रेम करता है।
मैं चेतावनी दे रहा हूं उस व्‍यक्‍ति को कि यदि वह आज दान पात्र में पांच सौ रुपए नहीं डालेगा तो कल इसी मंच से उस व्‍यक्‍ति का नाम सार्वजनिक कर दूंगा।
सभा समाप्‍त होने के बाद देखा तो उस दिन दान पात्र में पांच-पांच सौ के 20 नोट थे। दो नोट सौ-सौ के भी थे, और उनके साथ एक पर्ची लिपटी हुई थी।
इस पर्ची पर लिखा था- बाकी तीन सौ पहली तारीख को वेतन मिलने पर।
और उस दिन सभा में कुल 21 लोग ही मौजूद थे।